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अपने अन्दर की सोई हुई शक्तियों को जागृत कीजिये

शक्तियों को जाग्रत करें

ईश्वर से जुड़कर, अपनी शक्तियां फिर से प्राप्त करें

शक्ति दो तरह की होती है, एक शारीरिक और एक आत्मिक, शारीरिक शक्तियां हम बाहरी दुनिया से, भोजन से प्राप्त करते हैं। वहीँ आत्मिक शक्तियां हमें अन्दर, अपने अन्दर झाँकने से मिलती हैं। आत्मिक शक्तियों ईश्वरीय शक्ति से जुडी हुई हैं, जिसे हम अध्यात्म भी कहते हैं। आत्मिक बल, शारीरिक बल से कही शक्तिशाली है।

लेकिन हम उन शक्तियों को भूल चुके हैं, उन्हें सुला चुके हैं, माया और विकार से ग्रसित होकर। उनसे शक्तियां वापस प्राप्त करने के लिए, हमें माया और विकार से मुक्त होना होगा, पवित्र बनना होगा।

हम सब में उस परमपिता परमात्मा का अंश मौजूद हैं

हम सब उस एक महा शक्तिशाली परमात्मा की संतान है, वो हमारे परमपिता परमात्मा हैं। हम सब उनके अंश है, और उनका अंश होने के कारण हम सब में वही शक्तियां मौजूद है।

जैसे फूलों के पास जाने पर महक, पानी के पास जाने पर शीतलता, अग्नि के पास जाने पर गर्मी प्राप्त होती है। ठीक वैसे ही, ईश्वर के समीप जाने पर हमें उनकी शक्तियां स्वत: ही प्राप्त होती है।

हम उनकी संतान है, जो पिता का है वो संतान का ही है। लेकिन जब संतान अपने पिता से दूर रहता है, उसका कहना नहीं मानता, उसके बताये रास्ते पर नहीं चलता, तो शक्तियां भी उसे नहीं मिलती।

ईश्वर से हम कैसे जुड़ सकते हैं, और उनकी शक्तियां प्राप्त कर सकते हैं?

ईश्वर हमारे मन से जुड़े हैं, हमें उनसे मिलने के लिए एक रूहानी यात्रा करनी होगी। रूहानी यानी हमारी रूह या आत्मा, हम स्वयं को एक आत्मा समझकर, अपनी आँखें बंद कर, उस परमात्मा को और उनकी शक्तियों का ध्यान करेंगे। शक्तियां जैसे, सुख, शांति, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान, आनंद और शक्ति।

हम ऐसा महसूस करेंगे जैसे ये सारी शक्तियां हमारे पास स्वयं, खिंची चली आ रही हैं। हम उसे अपने अन्दर तक समाता हुआ महसूस करेंगे, और फिर धीरे धीरे आँखें खोलेंगे। उस परमपिता का धन्यवाद करेंगे, आपको अपने अन्दर एक नई शक्ति का एहसास होगा।

हमे ऐसा रोज़ सुबह और शाम करना हैं, मन की शक्ति तन की शक्ति से कही ज्यादा शक्तिशाली है। जीने के लिए दोनों शक्तियां चाहिए, पर मन की शक्तियां कमज़ोर हो तो, तन की शक्ति बे असर हो जाती हैं। ठीक वैसे ही, जैसे बल्ब और तार लगी हुई हैं, पर बिजली न हो तो रौशनी कैसे होगी?

अब आपको नित्य अपनी सोई हुई शक्तियों को जगाना हैं, आत्मा में बल भरना है। रोज़ उस परमात्मा को याद कर शक्तियां लेनी है, और इसके लिए खुद को एक पवित्र आत्मा समझना होगा। आप जितना पवित्र रहेंगे, उतनी जल्दी शक्तियां प्राप्त करेंगे।

(नोट – यह ज्ञान मैंने प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के द्वारा प्राप्त किया है। अगर इसे समझाने में कोई चुक रह गई हो तो, उसे पाठक जन उसे कमेंट में लिखे। उसे जल्द से जल्द सुधर किया जायेगा। धन्यवाद )

 

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Shyam Shah

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