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अपने बच्चों के साथ दोस्ती करने में  ही समझदारी हैं

बच्चों के दोस्त बनिएअपने बच्चों के अच्छें दोस्त बनिए, सिर्फ पेरेंट्स नहीं

बचपन में एक बच्चे के लिए उसके माता पिता ही सबकुछ होते हैं। वो बच्चा हर छोटी से छोटी बात के लिए माँ बाप पर निर्भर रहता हैं, क्योंकि वे नासमझ होते हैं, उनकी बुद्धि विकसित नहीं हुई होती। लेकिन जैसे ही बच्चे बड़े होने लगते हैं, माता पिता का ध्यान उनपर से कम होने लगता हैं, उन्हें लगता हैं अब बच्चे अब बड़े हो गए हैं। लेकिन सच तो यह हैं की बढती उम्र में ही बच्चों को एक दोस्त की ज़रूरत होती हैं।

अच्छें दोस्त हमसे कुछ नहीं छुपाते

दोस्त हर किसी को अच्छा लगता हैं, हम सबके जीवन में कोई न कोई दोस्त ज़रूर होता हैं। वो दोस्त, जिससे हम अपनी सारी बाते शेयर करते हैं, सबकुछ बताते हैं कुछ भी नहीं छुपाते। एक दोस्त में और पेरेंट्स में यही फर्क होता हैं, एक बच्चा अपनी समस्या को अपने माता पिता को बताने की जगह, उनसे सलाह लेने की जगह एक दोस्त की मदद लेता हैं, आखिर क्यों?

बच्चे अपने माँ बाप को दोस्त भले ही न समझे, पर हर माँ बाप को अपने बच्चें को दोस्त ही समझना चाहिए और इसके एक नहीं कई  फायदे हैं।

अपने बच्चों को दोस्त बनकर समझाइये

अगर बच्चा कोई गलती करता हैं तो उसे एक दोस्त की तरह समझाइए, उसके फायदे नुकसान बताकर। इससे बच्चें का मनोबल बढेगा, उसके अन्दर से डर दूर होगा, फिर वो गलती नहीं दोहराएगा।

परीक्षा के समय तो उसे सबसे ज्यादा डर अपने माँ बाप से रहता हैं कही उनके नंबर कम आये तो क्या होगा? इसी डर की वजह से वो पढाई ठीक से नहीं कर पाता।

ऐसे में उसका सच्चा  मित्र बनकर उसकी मदद कीजिये, उन्हें समझिए की वो अपना बेस्ट करें, रिजल्ट की चिंता न करें। फिर देखिये कैसे वो परीक्षा का आनंद लेगा और अच्छे नंबर भी लायेगा।

बच्चों से हर विषय पर स्वस्थ चर्चा कीजिये

बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं, तो कुछ असामाजिक तत्व उनके साथ अनैतिक दुर्व्यवहार करने की कोशिश करते हैं, बच्चे शर्म और तिरस्कार की भावना से ग्रसित होकर, इसे अपने अन्दर छुपा कर रखते हैं। एक कुंठित जीवन जीते हैं, वो डरते हैं अपने माँ बाप से ये सब बताने में। लेकिन अगर आप उनसे दोस्ती रखते हैं तो आप उनकी समस्या का समाधान कर सकते हैं।

एक बच्चे के लिए उसके माँ बाप से करीब कोई नहीं होता, उन्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त बनाकर अपने पास रखिये, ताकि वो गलत दिशा में न भटक जाए।

सच्चा दोस्त बनकर बच्चों का मार्गदर्शन कीजिये

बच्चे कभी कभी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते ही भूलवश गलत काम कर बैठते हैं, माँ बाप को धोखे में रखकर वो अपने लिए भी मुसीबत बुला लेते हैं। एक झूठ को छुपाने के लिए सौ और झूठ बोलते हैं, ऐसे में दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। अगर माँ बाप अपने बच्चों को दोस्त समझेंगे, तो वे सच बताएँगे, अपनी गलती नहीं छुपायेंगे।

आज से ही अपने अह: भाव को ख़त्म कीजिये और अपने बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त बनिए। ऐसा करके ही आप उनके जीवन शैली को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, और एक अच्छे पेरेंट्स साबित हो सकेंगे।

जनरेशन गैप तो हैं ही माँ बाप और बच्चों में, दुनिया भी कितनी तेज़ी से बदल रही हैं, हर काम का तरीका बदल रहा हैं। ऐसे में हर पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर उनके साथ चलना चाहिए। अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए, एक अच्छा दोस्त, पथप्रदर्शक और दार्शनिक बनिए।

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Shyam Shah

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