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अमृतसर ट्रैन नरसंहार हादसा – कुछ भयानक ग़लतियों ने जश्न को मातम में बदला

गलतियां कहाँ कहाँ हुई ?

अमृतसर – 19 अक्टूबर 2018 की काली रात जब लोग रावण दहन देखने आये थे।  किसे पता था कि थोड़ी देर में जश्न मातम में बदलने वाला है । लोग अपने घर परिवार के साथ आयोजन देखने आये थे । उधर रावण को जलाने का नियम पूरा हुआ और इधर धुआँ और पटाखों के शोर ने लोगो को तीतर बीतर कर दिया । पास ही जो रेलवे ट्रैक था लोग वहां से रावण दहन देखने लगे । सभी मोबाइल से फोटो और वीडियो शूट करने में बेखबर थे । किसी को पता नहीं या समझ नहीं थी की वो एक साथ बड़ी गलती कर रहे हैं । एक तो लोग पटरी पर खड़े थे , ऊपर से मोबाइल में व्यस्त ।

इस बात से सभी बेखबर थे की वो जिस जगह खड़े है वो लोगो के लिए नहीं बल्कि ट्रैन का मार्ग है । ट्रैन कभी भी आ सकती है और उसपर से लोग मोबाइल में इतने व्यस्त थे की उन्हें अपनी बढ़ रही मौत का पता ही नहीं चला। कुछ ही पल में सबकुछ तबाह हो गया ख़ुशी का मौसम मातम में बदल गया । ट्रैन सैकड़ो लोगो को काटती हुई , घायल करती हुई निकल गई ।

सेल्फी लेने की भी हद होती हैं !

फिर भी लोगो की अमानवीय और शर्मशार कर देने वाली हरकत की लोग इसके साथ सेल्फी ले रहे थे । लाश के साथ भी सेल्फी लेने का, दर्द से कराहते इंसान के साथ भी सेल्फी की ये परंपरा कितनी घटिया और तुच्छ हैं । जहाँ लोग ऐसा करके ये साबित करते हैं कि हमने इंसानियत को भुला दिया हैं । सभ्य कहलाने वाले नहीं हैं हम । कोई जीए या मरे , हम तो सेल्फी निकालेंगे ।

गलतियां जो मानव निर्मित थी और रोकी जा सकती थी

इस नरसंहार की जितनी निंदा की जाए कम हैं क्योंकि यहाँ जो हुआ उसे बिलकुल रोक जा सकता था जरा सी सावधानी को ध्यान में रखकर । अगर गलतियों की गिनती की जाए तो बात कही ख़त्म नहीं होगी । क्योंकि एक गलती छुपाने के लिए लोग हज़ार और गलतियां करते हैं । जब ये सबको मालूम हैं कि पटरी पर बैठना और चलना कानूनन अपराध हैं तो इस गलती को किया ही क्यों ? इसके अलावा सेल्फी का रोग जो इंसान को कुछ समझने नहीं देता ।

भारत में सबसे ज़्यादा हादसे हुए हैं दुनिया के मुकाबले । लोग सेल्फी और वीडियो बनाने के चक्कर में मौत को भी मात देने की नाकाम कोशिश करते हैं । अगर लोगो को आने वाले खतरे को अंदेशा होता तो शायद वो ऐसा नहीं करते । पर एक साथ सबकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी क्या ? कोई ये नहीं समझ रहा था कि वो जिस डाल पर बैठे हैं उसे धीरे धीरे काटा जा रहा हैं ।

वो शुक्रवार एक काला शुक्रवार बन गया

इस घटना ने पूरे देश और दुनिया को हिलाकर रख दिया । वैसे भी हमारे यहाँ घटना चाहे किसी भी कारण से हो , मरता तो आम आदमी ही हैं । घटना के बाद आरोप प्रत्यारोप का चलन आम बात हैं । क्या पक्ष और क्या विपक्षी पार्टी, सभी अपनी इज़्ज़त और कुर्सी बचने में लग जाते हैं । लाशों की कीमत लगाई जाती हैं नाम मात्र का मुआवजा देकर । जो घायल हो जाते हैं उन्हें थोड़ी बहुत आर्थिक मदद ।

असली राजनीती तो लाशों पर और आम इंसान की मौत पर होती हैं । राजनितिक रोटियां सेंकने के लिए यहाँ पर चीता की गर्मी का सहारा लेते हैं लोग । पहले कोई किसी के बारे में नहीं सोचता। पर मौत के बाद उस लाश पर सभी ऊना हक़ जमाते हैं, उनके दर्द में हमदर्द बनते हैं । जहाँ फायदे की बात न हो , वहां एक आदमी की कीमत कुछ भी नहीं हैं ।

हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी – अगर जीना हैं !

फिर भी इस घटना से कई तरह की गैर ज़िम्मेदारी की बात सामने आई हैं । जहाँ पर रावण दहन का आयोजन हुआ वो जगह सुरक्षित नहीं थी । फिर भी आयोजन की स्वीकृति मिलना। सुरक्षा का चाक चौबन्द न होना । लोगो के लिए किसी भी तरह की सुरक्षा का इंतज़ाम, किसी घटना के होने पर । ट्रेन ड्राइवर को सूचित न करना आयोजन की जानकारी न देना । कितनी सारी गलतिया हुई हैं । उस पर से आम लोग जो अपने जान को हमेशा जोखिम में डाल कर ज़िन्दगी को जीते हैं ।

आम आदमी हमेशा मज़बूर हैं जोखिम लेकर जीने को । उसके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता हैं, प्रसाशन को जनता का दर्द बाद में दीखता हैं । जब तक कोई दुर्घटना न हो जाए, तब तक कोई सुरक्षा का इंतज़ाम नहीं होता । ऐसे में अपने जान की सुरक्षा सिर्फ हमे स्वयं करनी होगी । प्रसाशन की गलती में हमारी ज़रा सी लापरवाही हमे ज़िन्दगी भर का ग़म दे जाती हैं ।

सबसे बड़ी हैं इंसानियत – उसे ही  हम भूल गए

हमें भी अपने इंसान होने का फ़र्ज़ निभाना हैं । लोगो की मदद की बजाए उनके साथ सेल्फी लेकर , इंसानियत को शर्मशार न करे। गलतियों से सबक लेकर हम जीवन की अहमियत को समझे नाकि फिर उसे दोहराये । कुछ गलतियां गलती होती हैं और कुछ हमारी नासमझी और मूर्खता ।

बस  एक ही प्रार्थना हैं

इस घटना ने मुझे बहुत प्रभावित किया हैं मैं बस यही चाहता हूँ की दुःख की इस घड़ी में उन्हें भगवान शक्ति दे । सरकार से जितना हो सके वो लोगो की मदद करे। लाशों की राजनीती बंद करे और उन्हें अच्छा मुवावजा दे । ताकि वो आगे जी सके अपने दम पर । साथ ही इस घटना में जो लोग अंगहीन, अपाहिज़ और अपँग हो गए हैं उसे रोज़गार दे । ताकि वो एक सम्मानित जीवन जीए । भगवान् सभी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे ।

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Shyam Shah

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