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आपकी कमजोरी ही आपकी सबसे बड़ी ताक़त है

 

अपनी कमजोरी को ही अपनी ताक़त बनाइये

दुनिया के हर इन्सान में किसी न किसी प्रकार की कमी ज़रूर होती हैं। कमी और विशेषता हम सबके अन्दर है। कुछ लोग पूरी ज़िन्दगी अपनी कमियों का ही रोना रोते हैं। वही कुछ लोग उसी कमी को अपनी विशेषता या ताक़त में बदलकर, कामयाबी के शिखर पर पहुँच जाते हैं।

ज़िन्दगी ऐसे ही लोगों को सलाम करती हैं, जो कमियों के कारण जीने का एक अलग अंदाज़ अपना लेते हैं। ऐसे लोगों की ईक्षा शक्ति बहुत मजबूत होती है, जिसके कारण इन्हें अपनी कमी में भी ताक़त नज़र आती हैं।

kamzori ko taqat banaiye

 इन्होनें अपनी कमजोरी को ताक़त में बदलकर मिसाल कायम की

अभिनेत्री सुधा चंद्रन को हम सब जानते हैं, वो एक बेहतरीन अदाकारा और नृत्यांगना हैं। लेकिन बचपन में हुई एक दुर्घटना में, उन्हें अपना बाया पैर गवाना पड़ा। इसके बावजूद भी उन्होंने नृत्य में अपना नाम कमाया। उन्होंने कृत्रिम पैर लगवाकर, स्टेज परफॉरमेंस किया, अपनी कमजोरी को ताक़त में बदल डाला। उन्होंने फिल्म ‘नाचे मयूरी’ में काम किया, उन्हें इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

मशहूर गीतकार, संगीतकार और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित स्व: रविन्द्र जैन जी, बचपन से ही दृष्टिहीन थे। उन्होंने अपनी इस कमी को वरदान समझकर, एक से एक गीत लिखे, उन्हें संगीत से सजाया और लोगों के दिलों पर राज़ किया। 70 और 80 के दशक में उनके गीतों ने पूरी दुनिया में धूम मचाई थी। फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

भरत कुमार एक पैरा स्विम्मेर हैं, जिनका एक हाथ नहीं हैं। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी इस कमी को अपने सपने के आगे आने नहीं दिया। वो अब तक 50 मैडल अपने नाम करवा चुके हैं। विदेशी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेकर, उन्होंने भारत का नाम रौशन किया हैं। उनकी कामयाबी हमें यही सिखाती हैं, की शरीर की कमजोरी से बुरी हैं मन की कमजोरी।

विश्व की पहली महिला पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा, जिनका एक पैर नकली हैं। अपनी इस कमी के बावजूद वो दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी एवरेस्ट पर चढ़कर, दुनिया के लिए एक मिसाल कायम किया। अरुणिमा सिन्हा को सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा जा चूका है।

अपनी कमजोरी पर रोइए नहीं, अपनी ईक्षा शक्ति को मजबूत बनाइये

कमजोरी शरीर में भी हो सकती है, कमज़ोर परिस्थितियां भी होती है, जिस पर आपका कोई जोर नहीं चलता। लेकिन एक आत्मविश्वासी व्यक्ति इन कमियों को दरकिनार करते हुए, कामयाबी की एक नई मिशाल पेश करता हैं। वो अपने बुलंद हौसलों के दम पर अभिशाप को वरदान में बदल देते हैं, और लोग उनके कायल हो जाते हैं।

दरअसल कमी शरीर में नहीं होती, कमी ईक्षा शक्ति में होती है, जो कोई भी बड़ा काम करने से रोकती हैं। अगर इरादा और ईक्षा शक्ति मजबूत हो तो, कोई कमी भी आपको कुछ कर दिखाने से रोक नहीं सकती। अपने इरादों को बुलंद और मजबूत बनाइये।

आप तब तक कमज़ोर हैं, जब तक आप ये मानते हैं, जिस पल आप ये निर्णय कर लेते हैं की मुझमे कोई कमी नहीं, उस दिन से आप जीत की और बढ़ने लगते हैंआपकी कमजोरी भी उसी दिन से ताक़त में बदलने लगती हैं

 

 

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Shyam Shah

3 Comments

  1. Filhal me ek farmer ka beta jo deaf nd dumb hai or uski maa blind h

    Deaf nd dumb beta bana IAS

    • sahi kah rahi hai aap Khushbu ji. Jivan me kathin paristhitiyon aur apni kamzoriyon se ladkar hi ek aam insan mahaan kaam kar jata hai. Kamzori me hi taqat ka beez chhupa hai.

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