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आपके अंदर जॉब मेंटेलिटी हैं या ओनर मेंटेलिटी ?

जॉब मेंटेलिटी और ओनर मेंटेलिटी क्या हैं?

JOB MENTALITY OR OWNER MENTALITY

कभी आपने सोचा हैं क्यों, कुछ लोग जीवन में अपार सफलता हासिल करते हैं?  वही कुछ लोग ज़िंदगी भर औसत ही बने रहते हैं? क्या हैं इसकी वजह ? क्या जो लोग इतने सफल होते हैं वो कुछ अलग तरह का विशेष ज्ञान रखते हैं ? क्या वो कुछ अलग काम करते हैं ? नहीं, इसकी सबसे बड़ी वजह है किसी भी काम को करने के दौरान हमारी मानसिकता क्या होती हैं?

एक हैं जॉब मेंटेलिटी और एक है ओनर मेंटेलिटी।   (Watch Video )

जॉब मेंटेलिटी होती हैं, किसी भी काम को एक जॉब मानकर पूरा करना।  अगर वो कही काम करते हैं तो वो सिर्फ उतना ही करते हैं जितना उनकी सैलरी होती हैं।  वो उतनी ही देर काम करते हैं जितनी देर के लिए उनको रखा जाता हैं। वो उतना ही करते हैं जितना उनको करने के लिए कहा जाता हैं।  वो किसी तरह बस अपने जॉब को पूरा करते हैं, ताकि उन्हें एक फिक्स्ड सैलरी मिल सके। दुनिया में इस मेंटेलिटी के लोग सबसे अधिक हैं।  

वही एक हैं ओनर मेंटेलिटी, जो किसी भी काम को सिर्फ अपना जॉब मानकर पूरा नहीं करता।  वो उसे जॉब से ज़्यादा एक ओनर या मालिक समझकर पूरा करता हैं। उसके लिए उसका काम एक जॉब नहीं हैं, बल्कि वो अपने काम को ओनर की तरह पूरा करता हैं।  उसकी पूरी जवाबदेही लेता हैं, उसकी सफलता और असफलता के लिए स्वयं को ज़िम्मेदार मानता हैं। इन्हें भी वही काम करना होता हैं, जो जॉब मेंटेलिटी वालों को करना हैं।  फर्क सिर्फ ये हैं की वो काम को सिर्फ पेमेंट या सैलरी पाने के उद्देश्य से नहीं करते। वो एक्स्ट्रा करते है और अपने काम में एक्स्ट्रा आर्डिनरी सफलता हासिल करते हैं।  

कैसे ये हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा हैं ?

इस तुलना के आधार पर हमें यह समझ में आता हैं की लोग क्यों जीवन में औसत या अपार सफलता हासिल करते हैं?  सफलता का आधार हमारे ज्ञान से ज़्यादा हमारी मानसिकता पर निर्भर करता हैं। इंसान ज्ञान और अनुभव की कमी से नहीं, बल्कि अपनी सीमित सोच के कारण सफलता हासिल नहीं कर पाता।  

सिर्फ काम के क्षेत्र में यह जॉब मेंटेलिटी काम नहीं करती, ये मानसिकता हमारे हर काम में दिखने लगती हैं।  हम पढ़ाई भी करते हैं तो एक जॉब मानकर, सीखने के लिए नहीं। सबसे बड़ी बात जीते भी उसी तरह से हैं, किसी तरह ज़िन्दगी के दिन काटते हैं, गुज़ारते हैं। हम ज़िन्दगी जीना भी एक जॉब मानते हैं।   

ओनर मेंटेलिटी वाला इंसान दुनिया का हर काम बड़े शौक से करता हैं।  वो उस काम में अपना बेस्ट योगदान देता हैं। चाहे नौकरी हो, रिश्ता निभाना हो, या ज़िन्दगी जीना, वो उसे एक बॉस की तरह पूरा करता हैं। वो ज़िन्दगी को मालिक की तरह जीते हैं गुलाम बनकर नहीं।  

ओनर मेंटेलिटी नहीं होने के कारण, लाखों लोग न जीवन से ज़्यादा खुश हैं न ज़्यादा हासिल कर पाते हैं। उन्होंने बस एक समझौता कर लिया हैं।  रोज़ इतना करेंगे तो इतना मिलेगा, चाहे मन करे या न करें। बस किसी तरह से अपना काम पूरा करना हैं। ऐसी ज़िन्दगी में कोई रोमांच नहीं, उत्साह नहीं वजह नहीं।  वही ओनर मेंटेलिटी वाला इंसान, हमेशा खुश रहता हैं, रोमांचित रहता हैं। क्योंकि उसके पास लक्ष्य हैं, बिना इसके जीवन में कोई उत्साह, उमंग नहीं।

क्या आप तैयार हैं बदलाव करने के लिए ?

जब तक हम इस जॉब मेंटेलिटी को लेकर चलेंगे, तब तक हम ज़्यादा आगे नहीं बढ़ सकते।  क्योंकि यहाँ सबकुछ सीमित हैं सीमित समय, सीमित सैलरी, सीमित प्रगति और सीमित संभावना। जब भी किसी भी काम को कीजिये, तो बस अपना जॉब पूरा करने के लिए नहीं कीजिये।  उस काम को एक ओनर की तरह कीजिये ताकि आप उस काम औरोँ से बेहतर तरीके से कर पाए। अगर हमें अपनी शक्तियों और विशेषताओं का सम्पूर्ण विकास करना हैं तो हमे इस जॉब मेंटेलिटी के चक्र से बहार निकलना होगा।  

आप किसी भी सफल व्यक्ति की सफलता का अध्ययन कीजिये, उन्होंने हमेशा ओनर मेंटेलिटी को अपने जीवन में अपनाया हैं।  ज़िन्दगी आपको बहुत कुछ देना चाहती हैं, पर क्या आप उसे पाने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं ? अपने अंदर से जॉब मेंटेलिटी को बाहर निकालिये और ओनर मेंटेलिटी को अपनाइये।  

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Shyam Shah

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