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इंसानियत पहले है और धर्म बाद में (Humanity is greater than any religion )

इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं

पहले इंसान आया की पहले धर्म आया ? इस बात पर अलग अलग धर्म के मत अलग अलग हो सकते हैं और यह एक विरोधाभास का विषय हैं। मुद्दे की बात यह है की इंसान अगर अपनी इंसानियत को ज़िंदा रखता हैं तो इससे बड़ा कोई और धर्म नहीं है।

example of humanity

धर्म में जुड़ गया हैं अधर्म

आज दुनिया में लोग अपने अपने धर्म को फ़ैलाने में लगे हैं, हर कोई अपने धर्म का प्रचार प्रसार ज़ोर शोर से कर रहा हैं। धर्म में क्या लिखा है इसका कोई सच्चा अनुयायी है या नहीं? इससे फर्क नहीं पड़ता।  अगर लोग अपने अपने धर्म में लिखी बातों को समझते तो दुनिया की तस्वीर में खून के लाल रंग नहीं, शांति का हरा रंग होता।

इस दुनिया को जिसने बनाया, उन्होंने कभी किसी इंसान को बनाने में कोई भेद भाव नहीं किया। रंग-रूप अलग अलग होना यह उनकी कलाकारी है उनकी रचना है। हर इंसान के सीने में दिल एक जैसे ही धड़कता हैं, हर किसी के खून का रंग लाल ही हैं इसे किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया।

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

दुनिया का हर धर्म यही कहता हैं की अपने धर्म से प्यार करो पर सभी धर्म का सम्मान भी करो। हर धर्म से हम कुछ न कुछ अच्छी बात ज़रूर सिख सकते हैं। धर्म को इसलिए लिखा गया, की लोग एक दूसरे के साथ मिल जुल कर रहे। हम चाहे तो दुनिया के हर धर्म से कुछ न कुछ अच्छा सीख सकते हैं।

insaniyat hai sabse bada dharm

आज धर्म की लड़ाई में लोग इंसानियत को बिलकुल भुला चुके हैं। वो धर्म के आधार पर लोगो को लड़ाकर  अपने स्वार्थ और खतरनाक मनसूबे की पूर्ति कर रहे हैं। उनका सबसे बड़ा धर्म हैं किसी तरह लोगो पर अपनी सत्ता और अपनी हुकूमत चलाना। उनका धर्म, स्वार्थ धर्म हैं।

आप पहले एक इंसान हैं बाद में किसी धर्म के  

आप  किस धर्म के हो, इससे ज़्यादा महत्व रखता हैं की क्या आप एक अच्छे इंसान हैं ? दुनिया में धर्म बहुत हैं उसे मानने  वाले भी बहुत हैं , पर उसे समझने वाले गिनती के कुछ लोग हैं। जो धर्म में लिखी बातों का असली अर्थ समझते हैं वो धर्म के लिए नहीं, बल्कि अधर्म  के लिए लड़ते हैं। वो दुनिया में हो रहे पाप और विनाश के लिए लड़ते हैं।

किसी भी धर्म की बात करने से पहले, हम ये समझ ले की हम सब पहले एक इंसान है। हम जीवन में चाहे जो कुछ भी बने, पर सबसे पहले एक अच्छे इंसान बने।

हमें ये कभी नहीं भूलना चाहिए की धर्म अपनी जगह हैं और इंसानियत अपनी जगह हैं। जिस दिन इस दुनिया से मेरा धर्म तेरे धर्म से अच्छा हैं ख़त्म हो जायेगा, उस दिन दुनिया में खुद शांति आ जाएगी।

हमारा शरीर प्रकृति से बना हैं, जो कभी किसी के साथ मतभेद नहीं करता  

ये प्रकृति, ये हवा, ये पानी और पेड़ का फल सबको एक जैसा सुख, आनंद और जीवन देता हैं। हम सभी इस प्रकृति से बने हैं हवा, पानी, आकाश, मिटटी और अग्नि, से हमारा शरीर बना हैं। हम सब में पहले उस प्रकृति का अंश हैं जिससे हमारा अस्तित्व हैं। हम उस प्रकृति से कुछ सीखते नहीं।

एक अच्छा इंसान सबसे पहले इंसानियत का काम करता हैं। वो धर्म और मज़हब से पहले बिना किसी स्वार्थ के रोते हुए को हंसाता हैं, ज़ख्म पर  मरहम लगाता हैं और भटके हुए को राह दिखाता हैं। इंसान वही हैं जो एक दूसरे इंसान के काम आता हैं।

इसलिए कहते हैं इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं, और मदद से बड़ा कोई कर्म नहीं।

 

 

 

 

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Shyam Shah

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