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इस दिवाली आतिशबाज़ी कीजिये खुशियों की – दिवाली मनाने का सबसे अच्छा तरीका

ये दिवाली दिलवाली

ye diwali dilwali

भारत में दिवाली से पहले ही इस बार प्रदुषण ने ऐसी दस्तक दी हैं की लोग सहम गए हैं।  देश की राजधानी दिवाली से पहले ही और भी ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। पराली जलने से पडोसी राज्य में, सबसे ज़्यादा नुकसान दिल्ली और एनसीआर को हुआ हैं।  सही मायनो में इस बार दिवाली में पटाखें फोड़ने से ज़्यादा ज़रूरी, प्रदुषण को नियंत्रित करना हैं।

ऐसे में दिवाली को ग्रीन दिवाली के रूप में मनाने की ज़रूरत हैं। ग्रीन शब्द को  को आज हर क्षेत्र से जोड़ने की ज़रूरत हैं। क्योंकि आजकल नेचुरल से हम सब दूर होते जा रहे हैं।  हम सब भी बने हैं प्राकृतिक तत्वों से, हम नेचर से अलग नहीं जी सकते। हम सब इंसान हैं रोबोट नहीं।  

इस बार की दिवाली में इसलिए रंग, रौशनी, श्रद्धा भक्ति, मिठाई और खुशियों का संगम पर जोर दिया जाना चाहिए।  इस बार की दिवाली को क्यों न हम कुछ इस तरह से मनाये की वो औरों के जीवन में और प्रकृति में भी खुशियां लेकर आये।

इन पांच तरीको से हम इस दिवाली को बेस्ट एवर दिवाली बना सकते हैं, यकीन मानिये इससे आपको बहुत अच्छा महसूस होगा।

घर के पुराने सामान को बेचें नहीं, ज़रूरतमंद को दान करें

दिवाली के दौरान लगभग सभी घरों में साफ़ सफाई होती ही हैं।  क्योंकि ऐसी मान्यता हैं की इससे लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं।  जब घर की साफ़ सफाई होती हैं तो ज़ाहिर सी बात हैं कुछ बेकार पड़े सामान बाहर निकलते हैं।  ऐसे सामान जो अब हमारे ज़रूरत के नहीं हैं। वो कुछ भी हो सकता हैं पुरानी किताबें, कपडे, खिलौने,बर्तन या कोई भी दूसरा सामान।  ऐसे में हम चाहे तो उस सामान को किसी को दे सकते हैं।

हमारे पुराने बेकार सामान अगर किसी गरीब या ज़रूरतमंद के काम आ जाए, तो कितना अच्छा हैं।  एक तो घर से बेकार सामान निकल जायेगा और दूसरा किसी और के काम आ जायेगा। चंद रुपयों के लिए उसे बेचने से अच्छा हैं किसी को दे देना।  ज़रा सोचियेगा, ऐसा करके आपको ख़ुशी और दुआ दोनों मिलेगी।

दिवाली के सजावट और दिए का सामान किसी गरीब से खरीदिये

दोस्तों हर साल मार्किट में बहार देशों से दिवाली सामग्री मंगाई जाती हैं।  मॉल कल्चर ने गरीबों से उसके खरीददार दूर कर दिए हैं। लोग भी फैशन के चक्कर में बाहर सामान बेच रहे विक्रेता की ओर देखते नहीं।  उनके भी घर में छोटे बच्चें हैं उनकी भी दिवाली बिक्री के भरोसे हैं। अगर उन्हें लाभ नहीं मिलेगा तो क्या उन्हें दिवाली की मिठाई मिलेगी।  

हम मॉल में मोल भाव नहीं कर सकते।  क्योंकि वहां प्राइस फिक्स्ड होती हैं।  लेकिन बेचारे गरीब से मोल भाव करते हैं, उससे सामान खरीदने में आनाकानी करते हैं।  मॉल वाला अमीर होता हैं और फुटपाथ वाला गरीब होता हैं। हम अपने शान के लिए अमीर और गरीब के बीच की दुरी को बढ़ाते हैं।  ऐसा नहीं हैं की माल की ज़रूरत नहीं हैं ज़रूरत सभी की हैं।

लेकिन ज़रा ये भी तो सोचिये की किसी के थाली में छप्पन भोग हो और कोई दाने दाने को मोहताज़ रहें।  आपसे विनती हैं इस बार किसी गरीब से खरीददारी कीजिये और उसे कुछ ज़्यादा ही पेमेंट कर दीजिये। डरिये मत वो आपसे ज़्यादा रुपये नहीं लेगा, क्योंकि उसका ज़मीर इज़ाज़त नहीं देगा। आप चाहे तो ख़ुशी से उसे बक्सीस दे दीजिये। करके देखिये ऐसा आपको बहुत ख़ुशी मिलेगी।  

पटाखें की जगह रंग, रौशनी और मिठाइयां

दोस्तों इस बार पटाखें कम इस्तेमाल और ग्रीन पटाखों की बात हो रही हैं।  ये बात हम सभी जानते हैं की मौजूदा परिस्थिति में वार्मिंग से जूझ रहा हैं।  ऊपर से दिल्ली और उसके आस पास के शहर तो अभी से ऑक्सीजन काम और ज़हरीले गैस छोड़ रहे हैं।  ऐसे में ज़रूरत हैं पर्यवरण प्रदुषण को। जी हाँ, अगर पटाखें कम छोड़ें जायेंगे तो, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

वैसे भी कहते दिवाली रंग और रौशनी का त्यौहार हैं नाकि शोर और धुंए का।  पटाखें ऊँची आवाज़ वाले, जिससे पशु पक्षी, पालतू घरेलु जानवर डरते हैं। इसकी आवाज़ और धुंए से उनकी जान भी जाती हैं।  पटाखों के धुंए शहर में दम घोटने वाली हवा की परत बिछा देते हैं। जिसके कारन सांस और कई खतरनाक बीमारियां हमें सौगात में मिलती हैं।  शोर और धमाकों से बच्चे डर जाते हैं, बढ़ें बुज़ुर्ग तकलीफ झेलते हैं। ऐसे में ग्रीन पटाखें (अगर उपलब्ध हो ) जलाएं या ना कह दे।

पटाखों के बचे पैसों से गरीबों के लिए दिवाली गिफ्ट्स खरीदें

पटाखों के पैसे जो बचेंगे आपके पास, उस पैसों से आप किसी गरीब के लिए गिफ्ट्स खरीदिये।  मान लीजिये आपके एक हज़ार रुपये बच गए, तो आप चाहे तो उससे गिफ्ट्स ले सकते हैं। गरीब स्कूली बच्चों के लिए आप १०० रुपये के अंदर एक स्टडी किट रेडी कर सकते हैं।  जिसमे कॉपी, पेन, इंस्ट्रूमेंट बॉक्स और लंच बॉक्स और एक चॉक्लेट रख सकते। हैं ऐसे दस गिफ्ट पैक आप किसी गरीब बच्चों को दे दीजिये, जो उनके बहुत काम आएगा। हमारे लिए वो सौ रुपये हैं लेकिन उनके लिए वो बहुत हैं।  कुछ गरीब इतने भी सामर्थ्य नहीं होते और नहीं खरीद पाते।

मैंने भी कई बार ऐसा किया हैं किताब, कॉपी, पेंसिल और लंच बॉक्स आदि बांटकर।  यकीन मानिये इससे आप बहुत बड़ा महसूस करेंगे।

लोगो को बताइये पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में।  

और आखिर में दोस्तों, लोगो को जागरूक कीजिये।  पोस्टर या टी शर्ट कैंपेन चलाकर लोगो को जागरूक कीजिये।  बहुत लोगो नहीं हैं की पटाखें किस तरह से पर्यावरण, सेहत और पशु पक्षियों को नुकसान पहुंचते हैं।  ऐसे में हम आसान भाषा में उन्हें समझा सकते हैं। अच्छी बातें लोगो तक पहुँचती नहीं और फ़ैल जाती हैं  जानकारी के अभाव में गलत काम बंद नहीं होते।

मित्रों, मेरा यही मानना हैं की संसाधन से पहले सोच की ज़रूरत हैं। एक सही और अच्छी सोच ही समाज में बदलाव ला सकती। जब तक लोगो की सोच नहीं बदलेगी  सारी अच्छी बातें बस सुनने में ही अच्छी लगेगी। इसलिए कहते हैं सोच बदलो दुनिया बदलो।

आप सभी को रंग और रौशनी का ये त्यौहार दिवाली, बहुत मुबारक हो।  आपका दोस्त – श्याम।

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Shyam Shah

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