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ईश्वर ज़िन्दगी देते हैं और डॉक्टर उसकी रक्षा करते हैं-हैप्पी डॉक्टर्स डे

ईश्वर का दूसरा अवतार है डॉक्टर

ये सच हैं की ईशवर हमें ज़िन्दगी देते हैं,पर उस ज़िन्दगी की रक्षा सुरक्षा, देखभाल के लिए डॉक्टर हमारे साथ होते हैं। अगर डॉक्टर न होते, तो क्या हम ठीक तरह से जी पाते? शायद कभी नहीं , एक डॉक्टर का सबसे पहला धर्म हैं अपने मरीज़ को ठीक करना, बिना किसी भेद भाव के।

डॉक्टर वो है जिस पर हम आँख मूंदकर भरोसा करते हैं, जिनके  पास जाकर हमें दर्द से स्वयं ही आराम मिलने लगता हैं। एक डॉक्टर से हम कभी झूठ नहीं बोलते, क्योंकि हम उनपर आस्था और विश्वास रखते हैं। 

डॉक्टर का स्पर्श और परामर्श दर्द पर मरहम का काम करता हैं, इसलिए हम डॉक्टर की तुलना भगवान्  से करते हैं।

डॉक्टर्स के इसी ज़ज्बे, धर्म और उनके काम को सम्मानित करने के लिए, भारत में  हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता हैं। दुनिया के अलग अलग देशों में इसे अलग अलग तारीख पर मानाने की परम्परा हैं।

आज डॉक्टर्स डे के दिन,हम सभी को उस डॉक्टर का दिल से धन्यवाद् कहना चाहिए, जिन्होंने  हमेशा  हमारे दर्द, पीड़ा को दूर कर हमें आराम दिलाया। इस दिन जूनियर डॉक्टर्स अपने सीनियर डॉक्टर्स को गुलदस्ता और ग्रीटिंग कार्ड देकर उनका सम्मान करते हैं। 

भारत में डॉक्टर्स डे मनाने का इतिहास

डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुवात भारत में 1991 से हुई थी। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विधान चन्द्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए हर एक जुलाई को चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में हुआ था। इनकी मृत्युं ठीक 80 वर्ष बाद 1 जुलाई, 1962 को हुई थी।

डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय एक दूरदर्शी, कल्याणकारी, समाज सेवी, स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने अपना सारा जीवन, दुसरो की देखभाल और सेवा में समर्पित कर दिया। उनके इस महान कार्य को देखते हुए, 4 फरवरी 1961 को डॉ. विधान चन्द्र रॉय भारत को सर्वोच्च नागरिक सम्मान- भारत रत्न से नवाज़ा गया।

महान फिजिशियन डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय पं. बगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे।

डॉक्टर्स की ड्यूटी कभी ख़त्म नहीं होती

दुनिया के लगभग हर काम, हर प्रोफेशन में एक दिन की छुट्टी और काम का समय फिक्स होता हैं, पर डॉक्टर के साथ ऐसा नहीं हैं। उन्हें ज़रूरत के समय हमेशा तत्पर  रहना होता हैं। डॉक्टर्स की ज़रा सी  लापरवाही और अनियमितता से, किसी रोगी की जान भी जा सकती हैं। 

इसीलिए, डॉक्टर की ज़िम्मेदारी लेने से पहले उसे ईमानदारी की शपथ दिलाई जाती हैं। साथ ही किसी के जान से नहीं खेलने की, हर हाल में अपना कर्तव्य निभाने की, शपथ भी दिलाई जाती हैं। उनसे उम्मीद की जाती है की वे अपने इस शपथ को हमेशा याद रखेंगे, और लोगो के काम आयेंगे।

एक डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारियां

एक डॉक्टर का पहला कर्तव्य हैं, अपने मरीज़ का हौसला बढ़ाना।

डॉक्टर अपने मरीज़ के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

एक डॉक्टर कभी इलाज़ में भेदभाव नहीं करते, उनके लिए हर मरीज़ एक समान हैं।

डॉक्टर  अपने काम के प्रति बेहद सजग और जागरूक होते हैं।

हर काम से ज्यादा ज़रूरी हैं,  मरीज़ की तकलीफ को कम करना।

डॉक्टर पर भरोसा बना रहें, ये कोशिश होनी चाहिए 

जब एक डॉक्टर अपनी इन नैतिक जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर, पैसे को ही अपना सबकुछ मानने लगता हैं, तो यह धर्म का काम अधर्म में बदल जाता हैं। जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता हैं।

डॉक्टर बनना एक बहुत ही ज़िम्मेदारी का काम हैं इसे सिर्फ कमाई का साधन समझने से, इसका गलत उपयोग होता हैं। इसलिए इस काम को धन कमाने सिर्फ पेशा न समझा जाए। ताकि डॉक्टर पर लोगो का वही भरोसा बना रहें,जितना उनका भगवान् पर होता हैं।

आइये इसी उम्मीद के साथ अपने डॉक्टर को धन्यवाद कहें, जिनकी बदौलत आज हम एक बेहतर ज़िन्दगी जी रहे हैं। हैप्पी डॉक्टर्स डे !

 

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Shyam Shah

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