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एक मज़दूर की जीत है मज़दूर दिवस

1 मई अंतराष्ट्रीय मज़दूर दिवस।

विश्व भर में श्रमिकों के महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 1 मई मज़दूर दिवस के रूप मनाया जाता हैं।

किसी भी देश की प्रगति उस देश के किसान और श्रमिकों पर निर्भर है। अक्सर लोग मज़दूर का मतलब दिहाड़ी करने वाले को समझते हैं। सच तो ये है कि हर मेहनतकश इंसान मज़दूर है। जो अपनी आजीविका के लिए परिश्रम करके धन कमाता है।

इसका अर्थ ये है कि चाहे वो दिहाड़ी मजदूर हो, मासिक वेतन पाने वाला हो, खेत में काम करने वाला, या किसी ऑफिस में काम करने वाला, सभी मज़दूर हैं।

 

क्यों मनाते हैं मज़दूर दिवस।

उनके अधिकारों की रक्षा हो, उन्हें ज़रूरी सुविधाएं मिले, काम से एक दिन की साप्ताहिक छुट्टी, वेतन का समय से भुगतान और काम करने का एक निश्चित समय मुकर्रर हो, इसके लिए इसकी शुरुआत की गई थी।

आज से करीब सवा सौ साल पहले मज़दूर की स्थिति दयनीय थी। उन्हें कोई भी ज़रूरी सुविधाएं नहीं मिलती थी। मज़दूरी के नाम पर बिना छुट्टी दिए, दस पन्द्रह घंटे काम करवाया जाता था।

महिला हो या बच्चा सबको एक जैसे काम करवाया जाता था। वेतन भुगतान में उनका आर्थिक शोषण होता था। ऐसे में दुनिया भर में मज़दूरों के हक़ के लिए आवाज़ उठाई जाने लगी। काफी संघर्ष के बाद मज़दूरों को उनका हक मिला।

भारत में मई दिवस पहली बार 1923 में चेन्नई में मनाया गया था। इसलिए मज़दूर दिवस एक तरह से मज़दूर के हक़ की आवाज़ है। कोई मज़दूर मजबूर न रहे इसके लिए मज़दूर दिवस मनाने का विशेष महत्व है।

मज़दूर दिवस पर आइये जानते हैं…

भारत में एक कामगार/वर्कर के विशेष अधिकार

जॉब एग्रीमेंट या अपॉइंटमेंट लेटर

किसी भी ऑफिस में भर्ती या जोइनिंग से पहले उसे जोइनिंग लेटर मिलना चाहिए। जिसमें उसके कार्य का विवरण, काम से जुड़ने का दिन, वेतन, कार्य का समय इत्यादि की जानकारी होती है।

ये उसके अधिकारों की रक्षा करता हैं। इसमें नियोक्ता के अधिकारों का भी उल्लेख होता हैं। ताकि कोई वर्कर नियोक्ता या कंपनी के साथ धोखेबाज़ी न कर सके।

कार्य स्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न से रक्षा।

अगर कार्य स्थल पर किसी भी महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न होता है तो वो इसके खिलाफ क़ानूनी शिकायत या कार्यवाही कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। दोषी साबित होने पर कठोर दंड, और जुर्माना लगाने का प्रावधान हैं।

किसी भी महिला के बारे में अपशब्द, रंग भेद, अश्लील साहित्य या तस्वीर दिखाना, गंदे मैसेज भेजना, उसकी आपत्तिजनक तस्वीर निकालना, काम के बदले यूं संबंध की मांग करना, सभी यूं उत्पीड़न की श्रेणी में आते हैं।

साप्ताहिक अवकाश और ओवरटाइम का भुगतान

भारत की कई बड़ी बड़ी लीगल कंपनी में मज़दूरों की हर सुविधा का विशेष दिसँ रखा जाता है। जैसे पुरुष और महिलाओं के कार्य समय में अंतर। उनके द्वारा 8 या 9 घंटे से ज़्यादा काम करने पर उसका अतरिक्त भुगतान। साथ ही सप्ताह में एक दिन की छुट्टी अनिवार्य होता है। छुट्टी के दिन काम करने पर उसके लिए अलग से भुगतान या अलग दिन छुट्टी मिलना भी अधिकार है।

गर्भावस्था में महिला कर्मचारी को अवकाश

किसी भी महिला को गर्भवस्था के समय कंपनी के नियम के मुताबिक प्री और पोस्ट छुट्टी देना अनिवार्य हैं। हर ऑफिस में ये नियम कुछ बदलाव के साथ हो सकता है। इस अवकाश के दौरान उसे सैलरी मिलती है। सरकारी और निजी कंपनी को मातृत्व अवकाश देना जरूरी हैं। इस संबंध में महिला कर्मचारी को इसके बारे में ज़रूरी जानकारी होनी चाहिए।

कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण, ज़रूरी सुविधा।

ये सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो सुनिश्चित करें,कोई भी कार्यस्थल कर्मचारी की सुरक्षा में लापरवाही न बरतें। उसके कार्य का वातावरण उसके स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान दे। अगर कार्य स्थल जोख़िम से भरा है तो उसके लिए सुरक्षात्मक उपकरण मौजूद हो।

स्वक्ष जल, पुरुष और महिलाओं के लिए अलग अलग टॉयलेट, धूल और धुवें से सुरक्षा, उचित प्रकाश आदि होनी चाहिए।

इसके अलावा अन्य अधिकारों में पेंशन की सुविधा, रिटायरमेंट पर पीएफ, मेडिकल और बीमा, मुवावजा आदि का अधिकार महत्वपूर्ण है।

अगर आपको ये लेख पसंद आया है तो इसे शेयर कीजिये, अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखिए। आप सभी को मज़दूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आपका मित्र – श्याम साह।

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Shyam Shah

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