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ऑस्कर के लिए नामांकित हुई रीमा दास की असमिया फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ – अब उम्मीदें टिकी सरकारी सहायता पर

असम की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ ने दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया

निर्देशिका रीमा दास की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’, भारत के असम राज्य की एक असमिया फिल्म हैं, जिसे इस बार ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया हैं।  बेहद लघु बजट में तैयार यह फिल्म, कई मायनो में विशेष हैं। इस फिल्म में काम करने वाले अधिकतर कलाकार नए और बिना किसी एक्टिंग फील्ड से हैं। इस फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत हैं इसकी कहानी, प्रस्तुति और टाइट बजट ।  87 मिनट अवधि की इस फिल्म ने अपने विषय वस्तु से अपने प्रतिभागी बड़ी और महँगी फिल्मों को हराकर, नया कीर्तिमान रच दिया हैं

कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं ‘विलेज रॉकस्टार्स’

निर्देशिका रीमा दास की यह दूसरी फिल्म हैं जिसने दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल्स में तमाम अवार्ड और वाह वही बटोरी हैं।  इसे इस साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार , सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार, बेस्ट एडिटिंग और बेस्ट साउंड रिकॉर्डिंग का अवार्ड भी मिला हैं।  

‘विलेज रॉकस्टार्स’  की कहानी

‘विलेज रॉकस्टार्स’ की कहानी एक १० साल की लड़की की हैं, जो रॉकस्टार बनना चाहती हैं।  इलेक्ट्रॉनिक गिटार खरीदने के लिए वो पाई पाई जोड़ती हैं। पर एक दिन उसके गाँव में बाढ़ / प्राकृतिक आपदा आ जाती हैं, जिसके बाद वो उन रुपयों का सही इस्तेमाल अपने सूझ बुझ से करती हैं।  यह फिल्म बच्चों के उम्मीद और विश्वास की हैं, उनकी समझदारी की हैं।

रीमा दास अपने आप में फिल्म क्रू हैं

बहुमुखी प्रतिभा की धनी रीमा दास ने इस फिल्म का न सिर्फ निर्देशन बल्कि इसकी एडिटिंग, सिनेमेटोग्राफी, कहानी, प्रोडक्शन डिज़ाइन, निर्माण और ड्रेस डिज़ाइन भी स्वयं किया हैं।  चुकी यह फिल्म बहुत ही कम बजट में बनी हैं, इसलिए इस फिल्म में सभी लोगो ने एक साथ कई रोल निभाकर फिल्म क्रू का काम किया हैं।

निर्देशिका रीमा दास आज किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं, वो एक अकेली पूरी फिल्म का निर्माण करने में सक्षम हैं।  उन्होंने इस फिल्म निर्माण के कई बागडोर को न सिर्फ संभाला हैं, बल्कि उसे बखूबी अंजाम देकर ऑस्कर अवार्ड की दौड़ में शामिल भी करवाया हैं।  

‘विलेज रॉकस्टॉर्स’ ने आज भारत देश का नाम रौशन किया हैं

आज उन्होंने अपने साथ साथ भारत और असम का नाम भी रोशन किया हैं।  असम, जहाँ सरकारी उपेक्षा के चलते फ़िल्में गिनती मात्र की बनती हैं, वहां से किसी फिल्म का ऑस्कर तक पहुँचना किसी सपने से कम नहीं लगता।  

आज पूरी दुनिया असम की भाषा, वहां की संस्कृति और खूबसूरती को देखकर मंत्र-मुग्ध हैं। ये बड़े ही गर्व और सम्मान की बात हैं हम सभी के लिए।  इंसान अगर दिल से कुछ करना चाहे तो सबकुछ कर सकता हैं, रीमा दास की ‘विलेज रॉकस्टार’ इस सत्य को प्रमाणित करती हैं। रीमा दास जो मूल शिक्षिका हैं, पर फिल्मों में उनकी रूचि शुरू से ही बनी रही।

उन्होंने अभिनय भी किया, फिर निर्देशन में हाथ आज़माया।  उन्होंने फिल्म मेकिंग वर्ल्ड सिनेमा को देखकर सीखा हैं, किसी फिल्म स्कूल या सहायक निर्देशक बनकर नहीं।  उन्होंने जो भी किया हैं उसे खुद सीखा हैं।

अगर स्वयं पर भरोसा हो तो सबकुछ संभव हैं   

रीमा दास की यह सफलता की कहानी, हम सभी के लिए प्रेरणा का विषय हैं।  कमी कभी बाहर नहीं होती, कमी हमारे सोच और विश्वास में होती हैं। अगर हम अपने काम और स्वयं पर भरोसा करें तो  कोई भी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार अगर चाहे तो ‘विलेज रॉकस्टॉर्स’ ऑस्कर भी ला सकती हैं

रीमा दास की यह फिल्म बॉलीवुड के फिल्मों की तरह बड़े बजट की फिल्म नहीं हैं, यहाँ पर उन्होंने अपने एक एक पैसों को जोड़कर ४ साल में इस फिल्म को बनाया हैं।  ऐसे में ऑस्कर अवार्ड के लिए फिल्म को जिस तरह के प्रचार की ज़रूरत होती हैं, उसके लिए बड़ी धन राशि चाहिए।

अगर विलेज रॉकस्टार्स को ऑस्कर दिलाना हैं तो इसमें सरकार  को आगे बढ़कर, इसके लिए उचित धन राशि की व्यवस्था करनी होगी। इससे पहले भी भारत की फ़िल्में ऑस्कर के लिए नामांकित तो हुई पर सरकारी उदासीनता के चलते ऑस्कर नहीं ला पाई। हम भारत और असम सरकार  से यही प्रार्थना करते हैं की विलेज रॉकस्टार्स को ऑस्कर दिलाने में कोई कसर न छोड़े।

कामयाब ज़िंदगी रीमा दास की इस कामयाबी पर उनको दिल से बधाई देता हैं, और आशा करता हैं की ‘विलेज रॉकस्टार्स’ ऑस्कर प्राप्त करें और भारत का नाम और शान बढ़ाये।        

      

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Shyam Shah

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