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औरों की मदद करना इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म हैं

मदद करना इंसानियत है दुसरो की मदद कैसे और क्यों करें ?

मदद या सेवा सिर्फ पैसों से ही नहीं, बल्कि आपके द्वारा किसी भी रूप में हो सकती हैं। किसी के पास पैसा हैं तो वो पैसे से मदद करता हैं, अगर किसी के पास पैसा नहीं हैं तो वो भी अपनी सेवा, अपने ज्ञान, अपने मुस्कराहट और अपने मीठे और प्यार के दो बोल बोलकर मदद कर सकता हैं। किसी को देने की ख़ुशी पाने से कही बढ़कर हैं, जब हम किसी के लिए अपना वक़्त अपनी सेवा प्रदान करते हैं, उस वक़्त हम खुद को महत्वपूर्ण समझते हैं। इसलिए औरों की मदद करना इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म और कर्म भी है।

मदद करने से ईश्वर की सच्ची सेवा होती है

‘घर से मस्जिद हैं, बहुत दूर चलो यूँ कर ले, किसी रोते हुए बच्चें को हसायाँ जाए’ यह गीत भले ही किसी फिल्म का हो, पर इसे असल जीवन में उतारा जाना चाहिए। इस गीत में खुदा की भक्ति करने का, सेवा करने का एक बेहद सज़दा तरीका बताया गया हैं। ये तरीका है, किसी के चेहरे पर मुस्कराहट लाकर, किसी के दुःख को दूर करके और किस ज़रूरतमंद की मदद करके। ईश्वर खुद इस धरती पर आकर मदद नहीं करते, वो अपने किसी एक बन्दे को इस नेक कार्य के लिए चुनते हैं, औरों की मदद करना मतलब ईश्वर का कार्य पूरा करने में साथ देना।

मदद करने से हमें भी फायदा मिलता है (watch video )

औरों की मदद करके दरअसल हम अपनी मदद करते हैं, हम स्वयं को खुदा के नेक कर्म में  भागीदार समझते हैं, हमे मानसिक शांति मिलती हैं, चित्त प्रसन्न रहता हैं, नींद अच्छी आती है और स्वास्थ्य भी ठीक रहता हैं। ज़रूरत के वक़्त हमें भी औरों से मदद मिलती है। इसलिए जब हम किसी की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं तो हमें बहुत अच्छा अनुभव होता हैं। जो व्यक्ति औरों की मदद करता हैं उसके मदद के लिए स्वयं ईश्वर तत्पर रहते हैं।

हर किसी के पास मदद करने का सामर्थ्य ज़रूर होता है

एक बार एक गरीब ने गौतम बुद्ध से पूछा मैं कैसे किसी की मदद कर सकता हूँ? मैं तो इतना गरीब हूँ। इस पर बुद्ध ने कहाँ- तुम्हारा चेहरा एक मीठी सी मुस्कान दे सकता हैं, तुम्हारा मुहं किसी की प्रशंसा कर सकता हैं, दो मीठे बोल बोलकर किसी को सुकून दे सकता हैं, तुम्हारे ये हाथ किसी ज़रूरतमंद की सहायता कर सकते हैं फिर भी तुम कहते हो की तुम्हारे पास किसी को देने के लिए कुछ भी नहीं हैं।

इंग्लैंड के भूतपूर्व प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था, ‘हम जो पाते हैं उससे हम अपनी ज़िन्दगी गुजारते हैं, पर हम जो देते हैं उससे हम अपनी ज़िन्दगी बनाते हैं’

ये दुनिया भी किसी न किसी के मदद से चल रही है

आज इस दुनिया में न जाने कितने लोग अपने अपने स्तर पर लोगों की सेवा कर रहे हैं। कोई गरीब के लिए घर, तो कोई स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, लाइब्रेरी, पार्क, मंदिर बना रहा हैं। हम  भी अपने घर के पुराने बेकार पड़े सामान को किसी गरीब को देकर उसकी मदद कर ही सकते हैं।

आप भी मदद करके मानवता की सेवा कीजिये

किसी को अपना ज़रा सा वक़्त देकर उसके काम आ सकते हैं, किसी अनपढ़ को पढ़ा सकते हैं, किसी गरीब को खाना और कपडा दिला सकते हैं। किसी भटके हुए को रास्ते पर ला सकते हैं। काम तो ऐसे बहुत हैं, हमें अपनी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करने का सुख और आशीर्वाद ज़रूर प्राप्त करना चाहिए।

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Shyam Shah

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