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कितने आज़ाद हैं हम ? आज़ाद भारत की वर्तमान सोच

आज़ादी और ग़ुलामी

आज हमारे भारत को आज़ाद हुए ७२ वर्ष हो गए हैं, आज हम आज़ादी का जश्न मन रहे हैं।  हमें ये आज़ादी नहीं मिली होती तो, आज भी हम अंग्रेज़ो के ग़ुलाम होते। बड़ी मुश्किलों से, संघर्ष और हज़ारों कुर्बानियां देकर, हमने इस आज़ादी को हासिल किया हैं।  जिन्होंने अंग्रेज़ो की बर्बरता और अन्याय को देखा हैं, उन्हें इस आज़ाद हवा में जीने का फर्क समझ आता हैं। हम खुश नसीब हैं की हम एक आज़ाद भारत में पैदा हुए। हम स्वतंत्र हैं, हम आज़ाद हैं और हम सब भारतीय हैं।  

kitne aazad hain hum

हम ये क्यों भूल जाते हैं की हम सब भारतीय हैं यहाँ पर एकता की बात होनी चाहिए।  आपसी सद्भाव, प्रेम और भाईचारा क्यों ख़त्म हो जाता हैं ? हमें अंग्रेज़ो की ग़ुलामी से मुक्ति मिल गई, पर हम आज भी अपनी संकीर्ण, सीमित और अनैतिक सोच के ग़ुलाम हैं।  हम बाहरी दुश्मनो से लड़ने के लिए विशाल सेना और हथियार से लैस हैं। पर देश के दुश्मनो से कैसे लड़े ? जो हमारे साथ भी हैं और हमारे विरुद्ध भी हैं।

क्या सच में हम आज़ाद हैं ? आज़ादी का मतलब मात्र घूमने फिरने की आज़ादी नहीं हैं।  आज़ाद होने का मतलब हैं अपनी सोच से भी स्वतंत्र होना। अगर कोई हमारी एकता और भाईचारे की सोच पर प्रहार करता हैं और हमें तोड़ता हैं, तो क्या हम आज़ाद हैं ? आज हम एक ऐसे भयावह साज़िश और षड़यंत्र के ग़ुलाम हो चुके हैं  जिससे हमें आज़ादी चाहिए।

एक अच्छी और महान सोच, लाखों का सही नेतृत्व करती हैं और लोग एक हो जाते हैं, एक बड़े लक्ष्य के लिए।  एक गन्दी और गलत सोच, लाखों को पथ भ्रमित कर उन्हें तोड़ती हैं, देश को तोड़ती हैं। सुचना क्रांति का गलत इस्तेमाल करके, आज मोब लिंचिंग जैसी घटनाये घटती हैं।  जहाँ इंसानियत मरती है और हैवानियत मुस्कुराती हैं, क्या यह हैं आज़ादी ?

एक अफ़वाह और दंगाई बातों को सुनकर  लोग अपना आपा खो देते हैं, क्या सही क्या गलत ? पहले भी दुश्मन डिवाइड एंड रूल का सहारा लेते थे, और आज कुछ स्वार्थी नेता इसका सहारा लेते हैं।  कहने को आज़ादी मिल गई हैं, पर असली आज़ादी अब भी मिलनी बाकी हैं। जब भी हम इंसानियत को मारेंगे, हम ग़ुलाम बनते जायेंगे।

जिस दिन हम इंसान को इंसान समझेंगे, उस दिन हम सही मायनो में आज़ाद होंगे।  आज़ादी का ये दिन हम सभी के लिए बहुत ख़ास हैं, इस आज़ादी को हमें याद रखना हैं।  इसलिए क्योंकि, अंग्रेज़ो को देश से बाहर करने में हमें 200 साल लगे थे।

क्रांतिकारियों की लड़ाई और क़ुरबानी से मिली हैं ये आज़ादी।  अब फिर से देश के अंदर के दुश्मन देश को तोड़ने में लगे हैं, इस वक़्त हमें एकजुट होकर लड़ना हैं ताकि अपना भारत देश हमेशा आज़ाद रहे।  कामयाब ज़िन्दगी की तरफ से आप सभी को आज़ादी का ये दिन मुबारक हो, जय हिन्द।

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Shyam Shah

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