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क्या हैं # मी टू मूवमेंट और कैसे इसकी शुरुआत भारत हुई ? पूरी जानकारी

# ‘मी टू’ मूवमेंट

आजकल हर न्यूज़ चैनल, अख़बार और सोशल मीडिया पर हमें एक नाम बहुत सुनने को मिल रहा हैं, वो हैं # मी टू मूवमेंट।  इस मूवमेंट से जुड़कर हर यौन पीड़ित महिला, अपने साथ हुई यौन शोषण की घटना को दुनिया के सामने ला रही हैं।

यह उन पीड़ित महिलाओ के लिए एक ब्रम्हास्त्र हैं, जो मज़बूरी या डर के कारण अपने साथ हुए ज़्यादती को सहती रही थी।  आज बड़े बड़े नामचीन कलाकार, निर्देशक, कॉमेडियन, पत्रकार, गायक और नेताओ की शर्मनाक और घिनौनी करतूत भी लोगो के सामने आ रही हैं।  

क्या आप जानते हैं, इस कामयाब मूवमेंट की शुरुआत कहाँ से और किस तरह से हुई ? और आज भारत में ये कैसे पीड़ित महिलाओं की मदद कर रहा हैं ? आइये समझते हैं।

सं २००६ में अमेरिका की एक सोशल राइट एक्टिविस्ट तराना बर्क ने इसकी शुरुआत की।  तराना एक सेक्सुअल असाल्ट सर्वाइवर हैं, उन्होंने इस आंदोलन की नीव रखी थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था की, किस तरह से वो बचपन से लेकर अब तक ३ बार यौन शोषण का शिकार हो चुकी हैं।

माय स्पेस सोशल नेटवर्क पर ये दो शब्द ‘मी टू‘ ने  इस मूवमेंट की शुरुआत कर दी। यहाँ पर यौन पीड़ित लोगो को यह बताना था की आप अकेली इसका शिकार नहीं हैं, मी टू यानि मैं भी।  

इसके बाद पिछले साल अक्टूबर २०१७ में एक बड़े अख़बार ‘नई यॉर्क टाइम्स ‘ ने हॉलीवुड फिल्म प्रोडूसर हार्वी वाइंस्टीन को लेकर बड़े खुलासे किए। इस खुलासे में यह बताया  तीन दशक के करियर में, हार्वी वाइंस्टीन ने ७० से ज़्यादा महिलाओं के साथ रेप और यौन शोषण जैसे घिनौने अपराध किये। हॉलीवुड एक्टर एलिसा मिलानो के मी # टू ट्वीट से जुड़ने के बाद इस आंदोलन ने बड़ी तेज़ी दिखाई।  

मी टू हैशटैग के साथ जुड़कर हज़ारों महिलाओं ने अपने साथ हुई, यौन शोषण की घटना को बताया।  देखते ही देखते हर क्षेत्र की महिला इससे जुड़ती गई और इस आंदोलन ने एक विश्वव्यापी रूप ले लिया। अब ये हर यौन पीड़ित महिला के लिए एक उम्मीद और एक सहारा हैं।  

भारत में मी टू मूवमेंट की शुरुआत कैसे हुई ?

एक न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर छेड़ छाड़ के आरोप लगाने के बाद इसकी शुरुआत हुई।  मी टू मूवमेंट से तनुश्री के जुड़ने के बाद कई और बड़े फ़िल्मकार, कलाकार कॉमेडियन, पत्रकार, गायक आदि के नाम यौन उत्पीड़न अपराध से जुड़ चुके हैं।

फिल्म इंडस्ट्री का बाहर से चमकता चेहरा अंदर से उतना ही स्याह हैं।  एक के बाद एक शर्मनाक और घिनौने अपराध की कहानी आज यौन पीड़ित महिलाएं सुना रही हैं।  # मी टू से जुड़कर वर्षों पुराने यौन अपराध के किस्से, आज लोगो की जानकारी में आ रहे हैं।  

# मी टू से कोई भी जुड़कर अपने साथ हुई नए पुराने यौन अपराध की घटना को बता सकता हैं।  यह एक बहुत बड़ी ताक़त हैं सोशल मीडिया की, जहाँ पर सिर्फ लोग टाइम पास नहीं करते। जहाँ लोग एक दूसरे के दर्द को समझते हैं  और जुड़ते हैं। किसी एक की आवाज़ को दबाया जा सकता हैं पर हज़ारों लाखों की आवाज़ को नहीं।

बस इस ताक़त का इस्तेमाल सही और नैतिक तरीके से हो।  विश्वास बनाने में जितना ज़्यादा समय, विश्वास गवाने में उतना ही कम समय लगता हैं।   

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Shyam Shah

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