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ग्रीन होगा सिग्नल – अपना टाइम आएगा

मौका हर किसी को मिलेगा, सबका टाइम आएगा

फिल्म ‘गल्ली बॉय’ का मशहूर गीत ‘अपना टाइम आएगा’ की तरह हम सबका भी टाइम आएगा।  बस हमें हिम्मत और ढांढस बनाये रखना हैं। उन सबको मौका मिलता हैं जो मौके की तलाश में रहते हैं।  इस बात को सिग्नल और गाड़ी के उदहारण से समझते हैं।

मौका सबको मिलता हैं और इंतज़ार भी सबको करना पड़ता हैं अपनी मजिल की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए। एक साथ सब की सिग्नल ग्रीन नहीं हो सकती कभी, ये सिस्टम इस तरह से काम कर नहीं सकता। जीवन में हमे इसी सिस्टम को फॉलो करना होता है । ट्रैफिक सिग्नल के तीन रंग, लाल, पीला और हरा हमारे जीवन के अन्दर भी होते हैं।

हम अपने कामयाबी के सफ़र में, बहुत से रुकावटों और ठहराव के साथ आगे बढ़ते हैं। सबको सिग्नल मिलता है उपरवाले से रुकने (लाल), तैयार होने (पीला) और आगे बढ़ने का (हरा)। जो इस सिग्नल को नहीं समझते वो आगे जाकर फंसते है। उपरवाले के यहाँ सबकी फरियाद पहुँचती हैं, वो सबकी फरियाद पूरी करते हैं। हमें ज़रा सब्र रखना चाहिए, थोड़ी देर भले हो जाए पर सिग्नल ग्रीन तो होती ही हैं।

जिन्हें सब्र नहीं होता, वो बहुत जल्दी मायूस हो जाते हैं और रास्ता बदल लेते हैं। कभी कभी थोडा वक़्त ज्यादा लगता हैं, सिग्नल ग्रीन होने में, जो शायद अच्छे के लिए होता हैं। हम उपरवाले का सिग्नल नहीं समझते तो कोसने लगते हैं। आपकी मंजिल की गाडी आगे बढाने  वाला ईश्वर आपको आपके टाइम के हिसाब से ही बढ़ने का सिग्नल देगा।

हम यह सोचकर की जब सब सिग्नल ग्रीन हो जायेंगे, तभी हम अपने सफ़र पर निकलेंगे, तो

आप कभी मंजिल तक पहुँच ही नहीं पाएंगे। जब हम कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो उसे रोड पर निकालते हैं, ये तो नहीं सोचते की अभी सिग्नल रेड हैं। कुछ सेकंड और मिनट के इंतज़ार के बाद हमारी गाड़ी भी आगे बढती हैं। ठीक उसी तरह जीवन के सफ़र और मंजिल की राह में, कुछ समय रुकना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। क्या पता हमारे हटते ही सिग्नल ग्रीन हो जाए, और हमें पछताना पड़े, यह कहकर की, काश ! थोडा रुक गए होते।

सिग्नल सिस्टम से सबका भला होता है, अगर सारे सिग्नल बंद कर दिए जाए तो कोई कही नहीं पहुँच पायेगा। सब एक साथ आगे बढ़ना चाहेंगे और फिर किसी की गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी। ऐसा हमें असल जीवन में भी सिग्नल काम न करने पर देखने को मिलता है। बिना सिस्टम के सब फ़ैल है।

ज़िन्दगी में जब सिग्नल रेड हैं तो संभलने की ज़रूरत हैं, सावधान रहना हैं, जल्दीबाज़ी बिलकुल नहीं करनी हैं। रेड सिग्नल तोड़ने वालें जुर्माना भी भरते है और जान को खतरें में डालते हैं। जब सिग्नल येलो हैं तो तैयार होने की ज़रूरत हैं, कमर कास लीजिये, अगर हमने ज़रा भी देरी की तो अटक जायेंगे। जब सिग्नल ग्रीन हैं तो आगे बढ़ जाइये बिना किसी रुकावट के, आपकी मंजिल सामने हैं। कुछ इस तरह से आपका भी टाइम आएगा।  

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Shyam Shah

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