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जितनी भूख हो उतनी ही लीजिये थाली में, ताकि बचा हुआ न जाए कचरे में

wastage of food in Indiaखाना बर्बाद करना मतलब किसी को भूखे मारना

मनुष्य के जीने की सबसे पहली ज़रूरत है भोजन, जिस भोजन के बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, उस भोजन को हमे ईश्वर का प्रसाद मानकर ग्रहण करना चाहिए। उस भोजन को हमे पूजना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए। दो वक़्त की रोटी कमाने के लिए कोई अपना घर परिवार से दूर रहता हैं, कोई अपनों से दूर रहता हैं। ये भोजन हर किसी के जीने का सहारा है।

अपने देश में हो रही हैं खाने की बर्बादी (watch video of this article )

आज भोजन की बर्बादी में भारत बहुत आगे पहुँच गया हैं, एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल भारत में करीब 50 हज़ार करोड़ रुपये का खाना बर्बाद हो जाता हैं। जिस देश मे खाने से पहले उसकी पूजा की जाती है, जहाँ अन्न देवता की पूजा होती हैं, आज उसी देश में खाने की ऐसी बर्बादी अमानवीय है।

देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मन की बात में, खाना बर्बाद करने को महापाप कहा है। जिस देश में आधे से ज्यादा आबादी को एक वक़्त का खाना मुश्किल से मिलता है, उस देश में खाने की बर्बादी पाप के समान है। खाना बर्बाद करके हम, किसी एक भूखे से उसका हक छीन लेते हैं। खाना बर्बाद होने से रोकना दुनिया के हर देश की, हर नागरिक की  ज़िम्मेदारी है।

खाने की कीमत सिर्फ रुपया नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ है

याद रखिये, आपके प्लेट तक खाना पहुँचने से पहले एक लम्बी यात्रा तय करता हैं। उसमे उस किसान की मेहनत शामिल हैं, जो बीज बोकर, फसल के पकने और कटने तक इतंजार करता हैं। उसमे लगने वाले पानी, खाद, बिजली सब कुछ शामिल है उसके तैयार होने में। फिर वो खाना पकता हैं जिसमे लगने वाले तेल, मसाले, पानी, गैस और मेहनत, सबकी कीमत जीरो हो जाती है, जब वो खाना प्लेट में बचकर, कचरे के पेटी में जाता है।

किसी भी हाल में खाना बर्बाद न हो

ये सरकार की भी ज़िम्मेदारी है की वो अन्न भण्डारण की व्यवस्था को दुरुस्त करें ताकि देश के लाखों क्विंटल गेहू, धान और डालें बर्बाद होने से बचें। दूसरी तरफ हम अपने घर से लेकर, लंच, पार्टी, शादियों में होने वाले खाने की बर्बादी स्वयं रोक सकते है, इसके लिए किसी कानून के पास होने का इंतज़ार नहीं करना हैं।

बर्बाद होने वाला खाना पहले तो बर्बादी तक पहुंचे ही नहीं, यह हमारी कोशिश होनी चाहिए। फिर भी अगर खाना बचता हैं, तो उसे हमें ज़रूरतमंद तक पहुँचाने की एक व्यवस्था करनी चाहिए।

खाना कम से कम बर्बाद हो इसके लिए हमें खुद से पहल करनी होगी।

ज़रूरत के हिसाब से खाद्य सामग्री ख़रीदे

घर की ज़रूरत के हिसाब से ही दूध, फल, सब्जियां आदि ख़रीदे। जिसे हम ज्यादा दिन नहीं रख सकते, उसका इस्तेमाल पहले ही करें। कई बार हम ज़रूरत से ज्यादा लाकर रख देते हैं जिसका नतीजा होता हैं बर्बादी।

प्लेट में खाना भूख के हिसाब से परोसे

जब भी खाना बनाये घर पे, सबकी ज़रूरत के हिसाब से बनाये। थकावट से बचने के लिए बहुत सारा खाना एक ही बार में न बनाकर रख दें। थाली में खाना इस तरह परोसे की, वो बर्बाद न हो। जो बच जाए उसे फ्रिज में रखें। अगर फ्रिज नहीं है, तो बचा हुआ खाना किसी ज़रूरतमंद तक पहुंचाए।

खाना शेयर करके खाए, बचें तो फेकें नहीं, किसी भूखे को दे

ऑफिस लंच में अगर खाना बचता हैं, तो उसे अपने किचन स्टाफ को दे। या किसी को खिला दे, फेंके बिलकुल नहीं। शेयर करके खाना खाने से खाना बर्बाद नहीं होता हैं।

पार्टी का बचा खाना फेकें नहीं बल्कि गरीबों तक पहुचाएं

घर में, ऑफिस में, शादी में जब भी कोई समारोह हो, तभी अपने स्थानीय इलाके के गैर सरकारी संस्था जो बचे हुए खाने को भूखे और गरीबों तक पहुचती हैं उसका पता कर लेना चाहिए। खुद से भी इसकी व्यवस्था कर लेनी चाहिए, की खाना अगर बचे तो आस पास के ज़रूरतमंदो तक इसे पहुँचाया जा सके।

खाने की जगह पेट में है, कचरे में नहीं

हम यह कसम खा लें की, हम घर में या किसी भी शादी, पार्टी में थाली में उतना ही लेंगे, जितना पेट में जायेगा। फ्री का खान समझकर लोग थालियाँ भर लेते हैं, पर उतना खा नहीं पाते, और खाना कचरे में जाता हैं। ज़रा सोचिये कोई वही खाना कचरे से चुन कर पेट अपना पेट भरता हैं।खाना सबके नसीब में नहीं होता हैं, हम खुशनसीब हैं जो हमे रोज़ खाना मिलता हैं। इस खाने को हम बर्बाद न करें, यह कोशिश होनी चाहिए।

खाने की जगह पेट में हैं, अगर वो किसी भूख से तड़पते हुए इंसान तक न पहुंचकर, गन्दी नाली और कचरे में फेंक दिया जाता हैं, तो हमें इंसान कहलाने का कोई हक नहीं हैं।

अगली बार खाना कचरे में डालने से पहले, ज़रा सोचियेगा आप किसी के खाने का हक छीन रहे हैं। भूखें को खाना खिलाना बहुत बड़ा पुण्य का काम हैं, और खाना बर्बाद करना उतना ही बड़ा पाप। आपको पाप का भागी बनना है, या पुण्य का ?

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Shyam Shah

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