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आत्महत्या में नहीं, आत्मचिंतन में समस्या का समाधान है

आत्महत्या
आत्महत्या में नहीं, आत्मचिंतन में समस्या का समाधान है

जीने के बहाने लाखों है, और जीने के लिए एक ही बहाना काफी है। फिर क्यों एक बहाना ख़त्म होने पर अपनी जान दे दी जाए? कोई दूसरा नया बहाना, जीने का तलाशिये। हार का मतलब ये नहीं की, जीवन लीला समाप्त कर दी जाए। ये हार चाहे पढाई, प्यार या अपने कैरिएर से हो। एक रास्ता बंद होता है तो हजारों नए रास्ते, नए अवसर मिल जाते है। फिर क्यों खुद अपने ही हाथों, अपनी ज़िन्दगी का गला घोंटना। मरने का रास्ता नहीं, जीने का एक बहाना ढूंढिए।

मरने से पहले जीना कभी मत छोड़िये

इस दुनिया में ईश्वर ने सभी को एक मकसद और निश्चित समय के लिए भेजा है। जब तक इंसान का वो मकसद पूरा नहीं होता या उसका वक़्त समाप्त नहीं होता, तब तक वो इस दुनिया से नहीं जा सकता। अगर उसके ज़िन्दगी की घड़ियाँ शेष है, तो वो मौत के दलदल से भी, सुरक्षित बहार निकल जाता है। क्योंकि उसे ईश्वर जिंदा रखना चाहते हैं। फिर क्यों अपने अस्थाई समस्या के लिए अपनी ज़िन्दगी को ख़त्म करना? आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है।

अपने जीवन और उपलब्धियों को गिनिये

क्या नहीं हैं आपके पास, आपके पास अच्छा खासा शरीर है, दिमाग है, उसका इस्तेमाल कीजिये। आप मरने के कितने भी कारण गिना ले, पर जीने का एक बहाना, ‘ज़िन्दगी बहुत खुबसूरत है’, काफी हैं। याद रखिये जिन्हें जीवन में कुछ बड़ा करना होता हैं, वो इन समस्याओं को समस्या नहीं बल्कि आशीर्वाद समझते हैं।

अपनी कमजोरी को अपनी ताक़त बनाइये

आपको निक वुजेसिक के बारे में शायद पता न हो, जन्म के समय से ही उनके पास दोनों, हाथ और दोनों पाँव नहीं थे। फिर भी उन्होंने अपना जीवन ऐसे जीया की, एक मिसाल बन गए। दोनों हाथ, पांव ना होने के कारण, वो सोच सकते थे, यह भी क्या जीना है, इससे तो मौत भली है। पर नहीं उन्होंने अपने इसी जीवन का शुक्रिया अदा किया, और लोगों के प्रेरणा स्रोत बन गए।

आज वो एक बहुत बड़े मोटीवेस्नल स्पीकर के रूप में जाने जाते हैं। उनकी वीडियोस को देखकर कोई नहीं सोच सकता, की इस हालत में भी ज़िन्दगी का लुत्फ़, आनंद उठाया जा सकता है। आपको उनके बारे में ज़रूर पता करना चाहिए। उनकी बेस्ट सेलिंग किताब “लाइफ विद आउट लिम्बस” ज़रूर पढनी चाहिए।

अपनों की ख़ुशी के लिए जिंदा रहिये

किसी के पास सबकुछ नहीं होता हैं, हर किसी के पास कोई न कोई कमी हैं, फिर भी वो जीते हैं, अपने लिए, अपनों के लिए, और जो उनके बिना नहीं रह सकते। अगर एक जगह कमी है, तो उसकी पूर्ती कही और से हो जाएगी।

ये जीवन ईश्वर का एक उपहार हैं, इसे अच्छी तरह से जीना हैं। इसको नष्ट करना मतलब ईश्वर को दुखी करना। आत्महत्या एक महापाप है। अगर कोई आत्महत्या करता हैं तो उसे इस पाप की सजा ज़रूर मिलती है। पाप का भागी बनने से खुद को रोकिये, अब भी देर नहीं हुई है, हर समस्या का हल है दुनिया में, परेशान मत होइए। बस जीने की चाहत जगाइए, ये ज़िन्दगी बहुत खुबसूरत है, इसे जीकर देखिये।

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Shyam Shah

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