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दुनिया आपके सोच के जैसी हैं, जैसी सोच वैसी दुनिया

जैसी हमारी सोच, वैसी हमारी दुनिया

किसी को ये दुनिया नरक लगती है, किसी को स्वर्ग लगती है, किसी को दुनिया से शिकायत है, किसी को दुनिया से मोहब्बत है, आखिर ये दुनिया हैं कैसी? जिसने इस दुनिया को जैसे समझा, जैसे जीया, जैसा अनुभव किया, उसे ये दुनिया वैसी ही लगती है। हम दुनिया के बारे में, या लोगों के बारे में जैसा सोचते हैं, वो हमे वैसी ही दिखती है। सोच बदलो तो सब बदल जाता है।

बुराई दुनिया में नहीं, दुनिया वालों की सोच में है। सब नकरात्मक और गलत सोच का असर है, वायुमंडल में इतनी नकारात्मकता फ़ैल चुकी हैं, की बस हर कोई इससे प्रभावित हो रहा है। जिसकी ईक्षाशक्ति कमज़ोर है, वो दुनिया वालों की बातों में आकर, दुनिया की बुराई कर रहा हैं, दुनिया से बदला लेना चाह रहा हैं। उसे बहकाया जा रहा है, उसकी सोच को दिशा भ्रमित कर, उसका इस्तेमाल किया जा रहा है, लोगो के बीच आतंक और दहशत फ़ैलाने में।

ऐसे में अपनी सोच को सकरात्मक और पवित्र बनाने की ज़रूरत है। अगर हम अन्दर से एक अच्छे इंसान हैं, और हमारे कर्म अच्छे हैं, हम विकारों से नहीं घिरे है, तो हमे ये दुनिया स्वर्ग लगती है, और दुनिया वाले भले लोग। इंसान का दिमाग जैसा सोचता है, वही रचता है। वह अपनी दुनिया का रचयिता खुद है। जैसी उसकी सोच होती हैं, वैसी ही उसके लिए दुनिया होती है।

अच्छे लोगों के लिए अच्छी, और बुरे लोगो के लिए बुरी है ये दुनिया। अगर हमारी सोच और मन शक्तिशाली है, तो बाहर की कोई गन्दी बात हमें प्रभावित नहीं कर सकती। अपने मन को शक्तिशाली बनाकर ही हम दुनिया वालों की स्वार्थी और नकरात्मक सोच से बच सकते हैं।

इस दुनिया में जो भी अच्छा या बुरा हो रहा है, उसकी शुरुवात एक सोच ही होती है। कोई इस दुनिया को आबाद करना चाहता हैं, तो कोई इसे बर्बाद। कोई भी चीज़ हो, उसपर हमारी सोच का असर पड़ता है। अगर हम एक ग्लास पानी तक प्रेम की तरंगे भेजे, तो वो पानी पीकर हम प्रेम महसूस करेंगे। अगर नफरत की तरंग भेजेंगे तो नफरत, ये वैज्ञानिक निति से प्रमाणित है। ठीक उसी तरह इस दुनिया के साथ भी है, जैसी सोच वैसी ही दुनिया का अनुभव हमें भी होता हैं। बदलना है, तो अपनी सोच बदलिए, सबकुछ बदल जायेगा, और आपकी अपनी दुनिया भी।

   

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Shyam Shah

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