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नए कानून से ज़्यादा, जान गँवाने का डर ज़रूरी है।

हमारे हक़ में या हमारे खिलाफ है ये बिल?

मोटर यान संशोधन विधेयक 2019 के पारित होते ही देश भर में लोगो में जबर्दश्त रोष नज़र आ रहा है। लोगो को जुर्माने की रकम में हुई भरी बढ़ोतरी से परेशानी हो रही है। लोग इसके खिलाफ आवाज़ उठा रहे है। पर क्या ये सच में हमारे साथ अन्याय है या हमारी जान की सुरक्षा के लिए उठाया गया सराहनीय कदम है। आइये समझते है।

अगर परिवहन मंत्री की माने तो इस नए संशोधित बिल का उद्देश्य लोगो के मन में कानून के डर से सड़क हादसों की संख्या में कमी लाना है। 30 साल पुराने इस कानून में बदलाव की ज़रूरत महसूस हुई। क्योंकि आये दिन लोग गलत तरह से गाड़ी चलाने से हादसों का शिकार होते हैं।

लापरवाही से होते हादसे और बेबस जनता।

ज़रा सोचिए कोई आराम से सड़क पर जा रहा है और एक गाड़ी गलत तरह से उस पर चढ़ जाती है। गलती किसी की और जान माल का नुकसान किसी का। कसूरवार थोड़ा बहुत जुर्माना देकर बच जाता है और बेगुनाह मारा जाता है।

ऐसे अनेकों मामले होते रहते है। कभी कोई लापरवाही से गाड़ी चलाकर खुद अपनी जान गँवाता है। हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, ड्राइव करते वक़्त फोन पे बात करना, किसी नौसिखिये या अयोग्य व्यक्ति द्वारा गाड़ी चलाना। शराब पीकर गाड़ी चलाना, एम्बुलेंस को रास्ता न देना, सिग्नल तोडना, गाड़ी के कागज़ात साथ में नहीं रखना, इन्स्योरंस नहीं करना । ये सब गलतियां करके लोग बड़े आराम से जुर्माना भरके निकल जाते थे।

पर जब देखा गया कि लोगों में कानून का कोई डर ही नहीं है तो सरकार को सोचना पड़ा। सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए क्या किया जाए?

ऐसे में ज़रूरत पड़ी वर्षो पुराने मोटर यान नियमावली को संशोधित करने की। और जब ये बदलाव कानून के रूप में लागू हुआ तो लोगो के पैरों तले से ज़मीन ही निकल गई। हाय तौबा मची की ये तो लूट है पर ये लूट नहीं है।

क्योंकि हल्का फुल्का जुर्माना भरके कसूरवार तो बच जाता था, लेकिन बेक़सूर मारा जाता था। और बात यहाँ जुर्माने की रकम की नहीं, ज़ख्म की है जिसे कम करना ज़रूरी है।

जान की कीमत समझिये

इस दुनिया में किसी भी सामान का उपयोग करने की एक मैन्युअल होती है। लोग सामान तो खरीदते है पर नियमों को कभी अपनाते नहीं। लाख रुपए की गाड़ी खरीदने में अपनी शान समझते है। पर चंद रुपयों का हेलमेट पहनने में शान में गुस्ताखी समझते हैं।

सच तो ये है कि ये नए नियम हमारी और सबकी सुरक्षा के लिए उठाये गए है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर हम सब सुरक्षित रह सकते है। पर कुछ लोग किसी अनहोनी की आहट से नहीं बल्कि धमाकों से जागते हैं। और ये मोटर यान संशोधन बिल वही धमाका है।

जुर्मानों से मत डरिये, नियमों को अपनाइये

अजी जुर्मानों से डरिये नहीं बल्कि नियमों का पालन कीजिये। जुर्माने से बहुत ही कम रकम में आप अपने गाड़ी के कागजात और सुरक्षित यात्रा का सामान खरीद सकते हैं। थोड़ा वक्त और पूंजी अपने सुरक्षित जीवन हेतु निवेश कीजिये। गाड़ी को भी अपने दुरुस्त रखिये, जीवन के सफर का आनंद लीजिये, जुर्माने के डर से मज़ा ख़राब करने में क्या मज़ा?

समझदारी जुर्माना भरने में नहीं, नियमों को अपनाकर कायदे से चलने में है। नए नियमों का स्वागत कीजिये, सुरक्षित रहिये और औरो को भी सुरक्षित रखिये। क्योंकि जान है तो जहान हैं।

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Shyam Shah

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