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नारियल – आस्था, भक्ति और आदर्श जीवन जीने का प्रतीक है

नारियल को हम आस्था, भक्ति और उच्च जीवन का प्रतीक क्यों मानते हैं ?

nariyal aastha aur pavitrata ka roop hai

नारियल एक ऐसा फल हैं जिसे हम प्राचीन काल से देवी देवताओ को प्रसाद के रूप में समर्पित करते आये हैं।  नारियल के पानी से शुद्धिकरण किया जाता हैं। कोई भी अच्छा, शुभ, आध्यात्मिक या पवित्र काम हो, नारियल के बिना पूरी नहीं हो सकती। हवन और यज्ञ में नारियल जलाया जाता हैं।  

किसी भी शुभ कार्य के उद्घाटन में या किसी भी नए काम में, नए वाहन की पूजा, नए घर में प्रवेश करने पर, नारियल फोड़ते हैं। शादी ब्याह, आदि में कलश के ऊपर नारियल रखा जाता हैं, जो नए जीवन की शुरुवात के लिए शुभ माना गया हैं।   

नारियल के कुछ ऐसे वशेष गुण हैं जो इसे सबसे पवित्र और आस्था का प्रतीक बनाते हैं। बलि प्रथा का प्रचलन बंद होने के बाद, नारियल को ही अब सब जगह चढ़ाया जाता हैं। लोग मन्नत पूरी होने पर नारियल फोड़ने मंदिर जाते हैं।

नारियल और आदर्श जीवन में समानता

नारियल के बाहरी भाग को हटाने पर इसके अंदर का कठोर भाग, इंसान के मस्तिष्क जैसा हैं। जैसे इंसान जब अपने अहंकार को छोड़ता हैं और अपने वासना का त्याग करता हैं, ठीक उसी तरह नारियल को फोड़ कर उसके अंदर के जल को ईश्वर को समर्पित किया जाता हैं।  यहाँ नारियल का टूटना, अहंकार के टूटने जैसा हैं और जल को समर्पित करना, अपने वासना को त्याग करके, ईश्वर के करीब पहुंचना हैं।

जब नारियल के पानी को प्रसाद में मिलाया जाता हैं तो वो पवित्र प्रसाद बन जाता हैं।  उसके पानी से जल अभिषेक करके हम अपनी आस्था और आत्मिक शक्ति को बढ़ाते हैं। नारियल के ये दैवीय गुण इसे सबसे पवित्र फल और उच्च जीवन का स्रोत और प्रतीक बनाते हैं।   

नारियल एक ऐसा फल हैं जो ज़मीन के खारे और सामान्य पानी को भी सबसे शुद्ध और मीठे पानी में बदल देता हैं।  इससे हमें ये ज्ञान मिलता हैं की परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो, हम उसे अपनी कोशिश से अच्छे में परिवर्तित कर सकते हैं।

हर तरह से काम आता हैं नारियल और पेड़

nariyal ka ped

नारियल का पेड़ हर तरह से काम में लाया जाता हैं, इसका कोई भी भाग व्यर्थ नहीं जाता।  ये हमारे शरीर के सामान्य हैं। इसके तने, और छिलकों आदि से रस्सी, चटाई जैसी और भी कई ज़रूरत की वस्तु बनाई जाती हैं। नारियल का तेल और साबुन, हमारे बाल और त्वचा की कुदरती देखभाल करता हैं

नारियल का फल एक उच्च और आदर्श जीवन का प्रतीक हैं।  जब हमारा जीवन उच्च विचारों और आदर्श से परिपूर्ण हो, तो हम कोई भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।  ईश्वर के समीप रह सकते हैं और सबके प्रिय बन सकते हैं। जब हम अपने अहंकार और वासन का त्याग करते हैं, तो ईश्वर के करीब और उनके प्रिय बन जाते हैं।

नारियल से सीखिए, जीवन का ज्ञान

नारियल का फल एक उच्च और आदर्श जीवन का प्रतीक हैं।  जब हमारा जीवन उच्च विचारों और आदर्श से परिपूर्ण हो, तो हम कोई भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।  ईश्वर के समीप रह सकते हैं और सबके प्रिय बन सकते हैं। जब हम अपने अहंकार और वासन का त्याग करते हैं, तो ईश्वर के करीब और उनके प्रिय बन जाते हैं।

जो ईश्वर के करीब और प्रिय हैं, वो सबका प्यारा बन जाता हैं। कहते हैं एक इंसान को बाहर से भले ही कठोर पर अंदर से नारियल सा कोमल और मीठा होना चाहिए।

नारियल का पानी दुनिया का सबसे शुद्ध पानी माना गया हैं।  जिसके सेवन से एक रोगी, रोगमुक्त हो जाता हैं। इसका पानी हमें सभी बिमारियों से दूर रखता हैं।  इसके जो स्वास्थ्यवर्धक गुण हैं उसकी तुलना में और कोई फल नहीं हैं। नारियल पवित्र हैं, शुद्ध फल हैं, आस्था और धर्म का प्रतीक हैं।  नारियल के ये सभी विशेष गुण मिलकर, नारियल को आस्था, भक्ति, और उच्च जीवन का प्रतीक बनाते हैं।

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Shyam Shah

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