1

पानी से सीखिए कामयाब ज़िन्दगी के राज़

पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझाती, जीना भी सिखाती है

पानी जिंदा भी रखती हैं और ज़िन्दगी जीना भी सिखाती है।पानी जिसका अपना कोई रंग नहीं होता, जो रंग डाल दो, उसका वही रंग बन जाता हैं। पानी जिसका मूल स्वरूप है, बहते रहना। पानी इंसान के लिए, प्रकृति के लिए, हर जीव जंतु के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है।

पानी की प्रकृति और उसकी विशेषताओं में समाई है जीने की कला

ज़िन्दगी में ठहराव नहीं बहाव होनी चाहिए

पानी कभी एक जगह रूकती नहीं, वो तो बहती रहती हैं, यहाँ से वहां। जैसे बहते रहना पानी का गुण हैं, वैसे ही ज़िन्दगी भी रूकती नहीं। अगर पानी जमा रहे एक जगह लम्बे समय तक तो उसमें से दुर्गन्ध आने लगती हैं, पानी सड़ने लगता हैं। ठीक उसी तरह ज़िन्दगी में भी बहाव होना चाहिए, रुक गए तो ज़िन्दगी भी उदास, उबाऊ और बासी होने लगती हैं।

पानी की तरह हमें भी हर परिस्थिति में अपनी जगह बनानी हैं 

पानी को हम चाहे कही भी रखें, किसी भी आकर या प्रकार में, वो उसमे अपनी जगह बना ही लेती हैं। ज़िन्दगी भी कुछ यही सिखाती हैं, लाइफ में एडजस्ट होना भी ज़रूरी हैं। कैसी भी परिस्थिति हो उसके लिए तैयार रहना ज़रूरी हैं, पानी सा स्वरुप अपनाकर।

अपने असल गुण और धर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए, पानी की तरह 

हम पानी को चाहे बर्फ बना दे या उसे उबाल दे, कुछ समय बाद वो अपने मूल गुण यानि शीतल स्वरुप में आ ही जाती हैं। हमें भी ज़िन्दगी में कभी अपने मूल गुण को नहीं छोड़ना चाहिए। हर परिस्थिति में भी हमें शांत रहना चाहिए। पानी अपनी शीतलता के कारण जाना जाता हैं, एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है शांति।

पानी की तरह सबके काम आना है 

पानी झरने से गिरकर पत्थर को, आसमन से गिरकर ज़मीन, और हमारे तन को साफ़ कर देती हैं। पानी से साफ़ होकर हम उर्जा और उत्साह महसूस करते हैं। पानी के संपर्क में आकर सबकुछ साफ़ हो जाता हैं, वैसे ही ज़िन्दगी में जब भी कोई हमसे मिले, तो उसकी आत्मा को प्रसन्नता महसूस हो, उसे लगे उसका मन साफ़ हो गया है आपसे मिलकर।

पानी की तरह सबके साथ एक बराबर व्यवहार करना है

पानी सबके लिए एक समान हैं, वो किसी के लिए भी भेद भाव नहीं करता। राजा हो या प्रजा, छोटा या बड़ा हर किसी की प्यास बुझाती हैं, पानी। हमें भी पानी का यह गुण धर्म समझते हुए, सबके साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए। पानी से जैसे प्यास बुझती हैं, वैसे ही आपसे हर कोई मिलकर खुद को तृप्त समझे।

पानी से ही जिंदगानी है

जैसे पानी हमारे कितने काम आता हैं, वैसे ही हम मनुष्यों को हर किसी के काम आना चाहिए। पानी अपना कर्तव्य नहीं भूलती, पर हम इंसान अपना कर्तव्य भूल जाते हैं। एक और कर्तव्य हमें करना है आज, हमे पानी कभी बर्बाद नहीं करना है, पानी से ही जिंदगानी है, तो पानी को बचाकर रखने में क्या परेशानी है?

 

 

Did you enjoy this article?
Signup today and receive free updates straight in your inbox. We will never share or sell your email address.
I agree to have my personal information transfered to MailChimp ( more information )

Shyam Shah

One Comment

  1. After reading this I get too much idea that we have to work daily we do we do not stop even for a moment like water if we stop our life will become dirty or bad to prevent this we have to work Delhi thanks for giving this idea from the example of water thanks thanks thanks a lot

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *