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पॉलिथीन बैग को ना कहिये और पर्यावरण की रक्षा कीजिए

पॉलिथीन बैग – प्राणी, पृथ्वी और पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन

(Article on plastic pollution in Hindi)

प्लास्टिक बैन – एक बड़ा कदम  स्वक्ष  भारत की ओर

पॉलिथीन बैग के बढ़ते प्रयोग और पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से, महाराष्ट्र सरकार ने (23 जून 2018) से एकल उपयोगी (single use plastic carry bags) पॉलिथीन बैग के इस्तेमाल पर पूर्ण पर्तिबंध लगा दिया हैं। इसका उल्लंघन करने पर 5000 रुपये से लेकर 25000 रुपये तक का जुर्माना और 3 महीने की कारावास की सजा की घोषणा कर दी गई है।

इस सख्ती का कारण है, प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाना

पर्यावरण को प्रदूषित करना, उसके लिए खतरा पैदा करना, पृथ्वी की ज़मीन और जल को दूषित करना, ये सब प्लास्टिक की देन हैं। जल, थल और आकाश में रहने वाले सभी प्राणियों की जान को जोखिम में डालने का अपराध भी प्लास्टिक के ऊपर हैं। प्लास्टिक के उपयोग पर कड़ा प्रतिबन्ध लगाना ही एकमात्र विकल्प है प्राणी, पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने के लिए।

प्लास्टिक की असली कीमत हम चूका रहे हैं पर्यावरण को खतरे में डालकर

प्लास्टिक उपयोग करने में, पूरे विश्व भर में भारत अव्वल स्थान पर हैं। पर्यावरण की रक्षा करना हम सब की भी नैतिक ज़िम्मेदारी है, जिसे बल प्रयोग से नहीं बुद्धि और विवेक से अपनाने की ज्यादा ज़रूरत हैं। इसलिए सरकार के इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए। जब पृथ्वी, पेड़ और जल बचेगा, तब ही तो हम रह पाएंगे।

पिछले कई दशक से पर्यावरण को जितनी क्षति प्लास्टिक और इसके अन्य उत्पादों से हुई हैं, उससे दुनिया भर में खतरा पैदा हो गया हैं। आसानी से उपलब्ध और बहुत सस्ता प्लास्टिक बैग, अब हमें उतना ही भारी पड़ने लगा हैं।

प्लास्टिक बैग अमर दैत्य की तरह हैं, जिसे हम मार नहीं सकते

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में, प्लास्टिक को बनाने में लाखों मिलियन बैरल तेल का इस्तेमाल होता हैं प्लास्टिक कचरे को दबाने और साफ़ करने में टैक्स पयेर्स का सारा रुपया भी बर्बाद हो जाता हैं। ये दुनिया के 4 % पेट्रोलियम की खपत करता हैं, जो वक़्त के साथ और बढ़ता जायेगा।

प्लास्टिक से पर्यवारण को नुकसान

ये युग प्लास्टिक का युग बन चूका हैं, आज पूरी दुनिया में प्लास्टिक ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली हैं। इसका आकर विशाल दैत्य की तरह हो गया हैं। प्लास्टिक को नष्ट करने का कोई भी कारगर उपाय नहीं हैं। इसे मिट्टी में मिलने  में १००० साल तक लग जाते हैं।

इसको जलाने से इसमें से खतरनाक किस्म के ज़हरीली गैस निकलते हैं, जिससे वायुमंडल पर बुरा असर पड़ता हैं। इसे मिट्टी में डंप करें तो मिटटी की उर्वरा शक्ति ख़त्म हो जाती हैं। इसे नाली, नदी या समुद्र में बहाने के कारण, बाढ़, सुनामी, जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।

हर साल लाखों समुद्री जीव, इसे धोखे से खाकर अपनी जान गवां देते हैं। वही गाय, भैस, पक्षी आदि प्लास्टिक में बंधे खाद्य पदार्थ और छिल्को को गलती से खाकर मर जाते हैं।

पॉलिथीन बैग : कैसे हुई थी इसकी खोज और कैसे बनाया जाता हैं ? read here

प्लास्टिक की थैली के बाद, अब चावल, अंडा और पत्ता गोभी भी प्लास्टिक की

प्लास्टिक के प्लेट में आप जो खाना खा रहे हैं, उसे ठीक से जांच ले कही उसमे प्लास्टिक के नकली चावल, अंडे या गोभी की सब्जी तो नहीं परोसी गई हैं। ये कोई मजाक नहीं हैं, हाल ही में चाइना ने भरिय बाज़ार में प्लास्टिक के चावल, अंडे और गोभी बाज़ार में उतारे थे। प्लास्टिक की कम कीमत के चलते उब उसकी नज़र हमारे खान पान पर भी पड़ चुकी हैं।

प्लास्टिक को ना करके, पर्यावरण की रक्षा कीजिये

(watch kamyab zindagi initiative to stop using plastic bags )

यही समय हैं की प्लास्टिक को हमेशा हमेशा के लिए ना कहने का, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को हम जीने के लिए एक सुरक्षित स्थान, साफ़ पानी और साफ़ हवा दे सकें। प्लास्टिक की थैली का पर्याय हैं जुट की थैली, कपडे की थैली आदि, जो हर तरह से पर्यावरण और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं, प्लास्टिक की तुलना में।

प्लास्टिक रुपी दैत्य को मात देना हैं तो आज से ही हमें प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ, और थ्र्मोकोल से  से बनी प्लेट, चम्मच, ग्लास, कटोरी आदि को ना कहना होगा। ये समय अब सोचने का नहीं, कुछ करने का हैं, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हम सब जीवित रहेंगे। सरकार के इस पर्यावरण स्वक्षता मिशन को आइये हम सफल बनाते हैं।

ये दुनिया बहुत खुबसूरत हैं, इसे प्लास्टिक के कचरे से बदसूरत नहीं बनाना हैं।

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Shyam Shah

3 Comments

  1. श्यामजी आधुनिकता के साथ कई लोग समझ गए हैं कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक हैं लेकिन लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह हैं कि लोगों को इसका विकल्प सही मुहैया नहीं हो पा रहा हैं. इसी कारण लोग इसका प्रयोग किये जा रहे हैं. मैंने इसी के लिए एक ब्लॉग https://dilsedeshi.com/kaise-banaya-jata-hai-polythene-bag/ लिखा हैं. आप इसे भी अपने ब्लॉग में जोड़ सकते हैं.

    • शशांक जी आपका धन्यवाद, आपकी बातों से मैं सहमत हूँ.. आपके कहने पर मैंने आपके लिंक को अपने ब्लॉग में जोड़ दिया हैं, शीर्षक के साथ..
      जो भी पढ़ना चाहेंगे फॉलो कर सकते हैं.. नमस्ते

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