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ताकि किसी और मासूम की इज्ज़त न लुटे फिर कभी

taki kisi masoon ki izzat

                  अपने मासूम की इज्ज़त की रक्षा आप की ज़िम्मेदारी है

पिछले दिनों जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मासूम बच्ची (असीफा बानो) से सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी जघन्य हत्या कर दी गई। इस घटने के बाद भारत ही नहीं पूरी दुनिया में इस घिनौनी करतूत की आलोचना की गई।

आरोपी पकडे गए, पर उन आरोपियों को सजा क्या मिले, इस पर फिर से मुद्दा गरमाया। सख्त कानून न होने की वजह से आरोपी छुट जाते हैं, या मामूली सजा के बाद छोड़ दिए जाते हैं।

सख्त कानून की कमी को दूर किया जाए

सख्त कानून की कमी अपराधियों का मनोबल बढाती हैं, और एक के बाद एक ऐसे कई घटनाये घटती हैं। सिर्फ कठुआ तक ही ये बात सिमित नहीं रही, उसके बाद भी ऐसी कई घटनाये हुई, जहाँ मासूम बच्चियां शिकार बनी।

जिस देश में देवी को शक्ति का प्रतिक मानकर उनकी पूजा अर्चना की जाती हैं, उसी देश की बेटियां आज हवस की बलि चढ़ रही हैं। आखिर क्यों? एक के बाद एक बहु, बेटी और बहनों की इज्ज़त को तार तार कर मार दिया जा रहा हैं? क्या उनका सिर्फ इतना कसूर हैं की वो लड़किया हैं ?

आखिर ऐसा क्या किया जाए जिससे किसी मासूम की इज्ज़त न लुटे फिर कभी ?

एक सर्वे के अनुसार हर दो में से एक लड़की यौन शोषण का शिकार होती है, हर पांच में से एक लड़की खुद को असुरक्षित महसूस करती है और हर 4 परिवार में से एक परिवार ऐसे मामलों को घर में ही दबाकर रखता है। यह बहुत खतरनाक है, बच्चियां अपने घर में, परिवार में, अपनों के बीच, पड़ोस में, स्कूल में, रिश्तेदारों के बीच कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।

ऐसे में अपने बेटी को घर से ही सुरक्षा का एहसास दिलाये और उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करें। ताकि ऐसी घटनाओ को होने से रोका जा सकें।

कैसे करें अपने मासूम की रक्षा ?

माता पिता, रिश्तेदार सभी का कर्तव्य हैं की वो अपने बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करें ताकि बच्चे ऐसे किसी घटना को बताने से डरें नहीं। इस विषय पर उनके साथ खुलकर चर्चा करें, उन्हें डराएँ नहीं बल्कि समझाकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाये।

अच्छे और बुरे स्पर्श की जानकारी दे, उन्हें बॉडी पार्ट्स के बारे में समझाए। माता पिता और डॉक्टर्स (अकेले नहीं ) केयर टेकर (साफ़ हाथ से ) उनके निजी अंगो को सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही छू सकते हैं। इसके अलावा कोई और अंगो को छुए तो वे चिल्लाकर सब को बताये।

अजनबी से ही नहीं पड़ोस और रिश्तेदारों से भी उन्हें सुरक्षित रखें। बच्चियों से बलात्कार के अधिकतर मामलों में उनके पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार, टीचर आदि दोषी पाए जाते हैं।

क्योंकि उनका घर पर आना जाना, बच्चों को फुसलाना आसान हो जाता हैं, भरोसे की आड़ में मासूम की अस्मत लूट ली जाती है, हत्या कर दी जाती हैं। इसलिए किसी भी हाल में अपने बच्चों की सुरक्षा में कोई कोताही न बरतें।

ऐसी घटना होने पर पुलिस को तुरंत सूचित करें, मामले को बदनामी के डर से छुपाये नहीं। क्योंकि बाद में इसी का फायदा उठाकर जघन्य अपराध को अंजाम दिया जाता हैं।

बच्चों के व्यवहार में कोई बदलाव दिखें तो इस पर बात करें, कई बार बच्चें डर से कुछ बताना नहीं चाहते। अपने निजी डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से इसके बारे में ज़रूर पूछें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालें किसी भी कीमत पर बख्से नहीं जाने चाहिए, क्योंकि ये समाज के लिए बहू, बेटियों और बहनों के लिए खतरनाक हैं। उन्हें ऐसी सजा दी जानी चाहिए, जो अपराधियों के मन में डर पैदा करें, ताकि वो ऐसा कुकर्म करने के बारे में सोच भी न सकें।

बलात्कार करने वाले किसी भी हद तक गिर जाते हैं, पहले बलात्कार और फिर बचने के लिए हत्या कर देना उन्हें बस एक खेल लगता हैं। बलात्कार करने वाला कभी बताकर अपराध नहीं करता, वो कोई भी हो सकता है।

इसलिए, सिर्फ आपको अपने बच्चियों की ज़िम्मेदारी उठानी हैं, हर कदम कदम सम्भलकर चलना हैं, ऐसी कोई गलती नहीं करनी जिससे अपराध को पनपने का कोई भी मौका मिलें। जब बेटियां सुरक्षित रहेंगी, तभी दुनिया रहने लायक बनेगी।

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Shyam Shah

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