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भारत में प्रचलित कुछ अन्धविश्वास और उनके पीछे छिपा सत्य

अन्धविश्वास के पीछे छिपी असली कहानी

क्या आप भी जाने अनजाने कुछ पुराने समय के नियमों को आधुनिक युग में फॉलो करते हैं।  जिसका महत्व या प्रभाव उस समय था पर आज उनमें कोई सच्चाई नहीं हैं। कुछ पुराने अंधविश्वास को मानने के पीछे कारण उसका चमत्कार हैं पर वो वैज्ञानिक रूप से सही साबित हैं।  

कुछ नियमों को हम डर से मानते हैं और कुछ को बिना किसी तर्क के मानते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे पुराने समय से चले आ रहे नियमों को जिसे अंधविश्वास भी कहते हैं हम।

अगर काली बिल्ली रास्ता काट दे तो अशुभ होता हैं

आज के ज़माने में भी कितने लोग इस बात पर यकीन करते हैं की अगर वो किसी अच्छे काम के लिए जा रहे हो, और काली बिल्ली रास्ता या सड़क पार करे तो, उनका काम नहीं बनता।  इस विश्वास के पीछे कोई सच्चाई नहीं हैं। कितने लोग ही इसे सच नहीं मानते और उनके साथ कुछ बुरा या अशुभ घटित नहीं होता। उसी समय अगर किसी के साथ कोई घटना हो जाए, तो उनका विश्वास गहरा हो जाता हैं की इसके पीछे काली बिल्ली का हाथ हैं।  

कैसे ये प्रचलन में आया ?

पुराने  समय में जब लोग बैल गाड़ी और बग्घी की सवारी करते थे, और जंगल के रास्ते में अंधकार के वक़्त जंगली बिल्ली जैसे लोमड़ी, चीता, हायना आदि उनके रास्ते में आते थे।  उनकी चमकती आखों को देखकर घोड़ा और बैल डरते थे। इसलिए जो चालक था, वहां कुछ देर गाड़ी को रोक देता था। ताकि उनका दर कुछ काम हो जाए। कभी कभी ऐसे में कोई दुर्घटना भी  घट जाती थी। आज उन जंगली बिल्लियों की जगह काली बिल्लियों ने ले ली हैं, पर विश्वास अभी भी कायम हैं, की कुछ बुरा हो जायेगा।

आखिर पशु भी तो अपना रास्ता पार करेगा ही, जैसे हम इंसान रोड क्रॉस करते हैं।  फिर इसमें डरने और अशुभ मानने वाली कौन सी बात हैं? सोचिये ज़रा।

रात के समय नाख़ून या बाल नहीं काटना चाहिए

सूरज ढलने के बाद या रात के समय नाख़ून नहीं काटना चाहिए।  ऐसा हमारे बड़े बुजुर्ग कहते रहे हैं। पर इसके पीछे की सच्चाई बहुत लोग नहीं जानते।  उन्हें लगता हैं, ऐसा करने से कुछ बुरा हो सकता हैं।

दोस्तों पहले के समय में जब बिजली नहीं थी, तब शाम को नाख़ून या बाल काटने से  कटने डर बना रहता था। इसकी कारण समय इसकी मनाही थी। पीढ़ी दर पीढ़ी यह बात चलती आई, और हम इसे आज भी मानते हैं। आज के समय में इस बात में कोई सच्चाई नहीं हैं, आज हम कभी भी, किसी भी समय नाख़ून या बाल काट सकते हैं।  

घर के अंदर  छतरी खोलना अशुभ होता हैं।  

लोग आज भी इस बात को मानते हैं की घर के अंदर छतरी खोलना अशुभ हैं।  इस मान्यता के पीछे एक सच्चाई हैं उस समय के हिसाब से। पहले के दिनों में छतरी  बहुत ही भारी, नुकीली हुआ करती थी। जिसे घर के अंदर खोलने से घर के सामान को नुकसान पहुंच सकता था।  अगर नुकीले भाग से किसी के शरीर को चोट भी लग जाती थी।

इसलिए उस समय घर पर छतरी खोलने को गलत समझा जाता था।  पर आज के ज़माने में पूरी तरह से सुरक्षित हैं, इसे मानने की अब कोई ज़रूरत नहीं रह गई।

शाम के समय झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी चली जाती हैं।

अक्सर घर के बड़े बुजुर्ग  अपने बहु बेटियों को शाम को घर में झाड़ू लगाने से मना करते हैं।  इस मान्यता के पीछे भी पुराने ज़माने की मज़बूरी हैं, जिसे जाने बिना हम इस पर विश्वास करते हैं।

दरअसल पहले ज़माने में घर की औरतें बहुत सारा गहना पहनती थी।  पहले ज़माने में जब बिजली नहीं थी, तब शाम को झाड़ू लगाने से आभूषण बाहर चला जाता था।  इससे बचने के लिए यह नियम बनाया गया। और तब से यह नियम चला आ रहा हैं।

अगर घर में बाल गिरे हो तो परिवार में कलह होता हैं

लोग अक्सर घर में बाल गिरने पर कहते हैं की इसे बाहर फेको नहीं तो झगड़ा हो जायेगा। असलियत तो यह है की, बाल उड़कर खाने में गिर सकता हैं।  खाने में अगर बाल मिले तो यह झगडे का एक कारण बन सकता है। इसलिए इसे मानना चाहिए, नाकि किसी अन्धविश्वास के कारण।

जिसे आज हम अन्धविश्वास मानते  हैं, उसके मानने के पीछे है कही मज़बूरी, कही डर।  पुराने समय में वो परिस्थिति के कारण प्रचलन में आये थे। जो सही है, उसे उसे मानिये और जो गलत हैं उसकी असलियत जानिए।  

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Shyam Shah

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