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मान लो तो मुश्किल, ठान लो तो जीत आसान हैं

मुश्किल को मुश्किल और आसान को आसान कौन तय करता हैं?

आम ज़िन्दगी में हम सभी को किसी न किसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता हैं। जिनमे से कुछ हमारे नियंत्रण में होती हैं, और कुछ हमारे नियंत्रण से बाहर होती है। मुद्दे की बात यह हैं की यह नियंत्रण या सीमा तय कौन करता हैं? यह हमसे कौन कहता हैं की ये काम तुम कर सकते हो, और ये काम तुम कभी नहीं कर सकते। यह हमारा मन तय करता हैं, इसलिए कहते है, मान लो तो मुश्किल और ठान लो तो जीत आसान हैं।

हर काम शुरू में मुश्किल लगता हैं, प्रयत्न से वो आसान बन जाता है

ज़रा सोचिये! अगर किसी के कहने मात्र से काम का होना या न होना निर्भर होता, तो आज दुनिया कुछ अलग ही होती। क्योंकि आज तक इस दुनिया में जितने भी नए नए अविष्कार या बदलाव हुए हैं, उनकी शुरुवात मुश्किल और नामुमकिन शब्द से हुई थी। ऐसे हजारों उदहारण भरे पड़े हैं किताबों में जिसे हमने कभी न कभी ज़रूर पढ़ा होगा।

अंधकार को दूर करने के लिए आज हम जिस बल्ब को जलाते हैं, उसे बनाने वाले थॉमस एडिसन ने १० हज़ार बार प्रयत्न किया, पर उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने साबित कर दिखाया की अगर आपका मन आपके नियंत्रण में हैं, तो दुनिया की हर मुश्किलों का सामना आप बड़े आसानी से कर सकते हैं।

 खुद को यकीन दिलाने पर जीत आसान हो जाती है

असली लड़ाई दुनिया वालों के राय, मशवरे को सुनकर रुकने में नहीं हैं, बल्कि स्वयं पर अचल, अडिग विस्वास रखते हुए, अपने सपने को जिंदा रखते हुए उसे पूरा कर दिखाने में हैं। जब आप सफल होते हैं, तो यही लोग आपको सलाम करते हैं। याद रखिये इन्सान कोई भी लड़ाई अस्त्र शस्त्र के बल पर नहीं बल्कि अपने मज़बूत इरादों और बुलंद हौसलों के दम पर जीतता हैं।

किसी काम को कर पाने की या नहीं कर पाने की सोच पहले हम पैदा करते हैं, अगर आप को लगता हैं की आप यह कर सकते है तो सारे रास्ते आपके लिए खुल जाते हैं, वही जब आपको लगता हैं आपसे यह काम नहीं होगा तो सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।

फैसला आपको करना है, क्योंकि जीतना भी आपको हैं

इस दुनिया में सबसे आसान  हैं की आप औरों की निराशाजनक बातें सुनकर पीछे हट जाए और समझौता कर ले। लेकिन जब आप औरों की बातों की कोई परवाह नहीं करते और अपने सपने को पूरा करने के लिए रात दिन एक कर देते हैं, तो वो काम फिर मुश्किल नहीं लगता, वो तो आसानी से पूरा हो जाता हैं।

‘मुश्किल काम’ कुछ नहीं होता, मुश्किल होता हैं अपने मन को समझाना, लगातार विस्वास दिलाना की ये काम मैं कर सकता हूँ। और जब आपका मन आपके नियन्त्र में होता हैं तो मुश्किल मुश्किल नहीं रह जाता, बल्कि ये तो  ‘आसान हैं’ हो जाता हैं।

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Shyam Shah

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