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पैसिव इनकम करके लगाए पैसो का पेड़

पैसिव इनकम करके, कैसे लगाए पैसो का पेड़ ?

अक्सर हमने ये लोगों को कहते सुना है, रुपये पेड़ पर नहीं उगते, जब जितना चाहे तोड़ कर दे दिया। काश की रूपये पेड़ पर उगते, तो कितना अच्छा होता? हर कोई यही सोचता है। क्योंकि रुपये के बिना ज़िन्दगी नहीं कट सकती। जीने के लिए रुपये चाहिए, और अच्छे से जीने के लिए ज्यादा रुपये चाहिए।

मज़े की बात यह है की, अगर ज़रा सी कोशिश की जाये तो रुपये का पेड़ लगाया जा सकता हैं। यहाँ रुपये के पेड़ का अर्थ हैं, कम से कम मेहनत करके अच्छी आमदनी करना। पैसिव इनकम करने में पहले बहुत वक़्त लगता हैं, पर बाद में उसका फायदा हमें कई गुणा मिलता हैं। इसका एक उदाहरण है MLM , आइये इसे समझते हैं। 

गरीब होने में और रुपये नहीं होने में, सोच का फर्क हैं

रुपये आज नहीं है, पर कल रुपये आ जायेंगे, ये सोच उसकी है जो कमाने का सही तरीका जानता है। जो ये जानता है की जितनी बड़ी सोच होगी, कमाई भी उतनी ही बड़ी होगी।

वही एक छोटी सोच वाला, हमेशा गरीबी में ही फंसा रह जाता है। उसे बस गुज़र बसर करने वाली कमाई नसीब होती है। क्योंकि गरीबी उसके सोच में ही बसी हुई हैं।

छोटी सोच वालों के लिए नहीं हैं, ये रूपये का पेड़

आइये एक उदहारण लेते है, दो दोस्त एक ही MLM कंपनी में काम करते हैं। एक दोस्त सिर्फ उस कंपनी का प्रोडक्ट खरीद कर, कुछ प्रतिशत मुनाफे में रोज़ उसे ग्राहकों को बेचता है। उसे इसके नेटवर्किंग में कोई इंटरेस्ट नहीं है। वो आर्डर के अनुसार, प्रोडक्ट खरीदकर उसे बेचता है और सिर्फ वर्तमान में कमाई करता हैं। अगर वो काम नहीं करे तो, उसकी कमाई भी नहीं होगी।

बड़ी सोच वाले, धन कमाने का आईडिया यानि पैसे का बीज बोते हैं

वही उसका दोस्त, उसी कंपनी के ट्रेनिंग में अपना समय देता है। लोगों को अपने साथ जोड़ता हैं, उन्हें ट्रेन करता हैं, उनकी चैन बनाता हैं, नेटवर्किंग करता हैं। एक तरह से वो धन कमाने का बीज बोता हैं, शुरुवाती मेहनत करता हैं।

जब उसके नीचे वालें मेहनत करते हैं तो धीरे धीरे वो काम में तरक्की करता हैं। वो उन्हें सिर्फ सपोर्ट करता हैं, आगे बढ़ाने में। उसने जो शुरुवात में कड़ी मेहनत की थी, अब उसके बदले में उसकी कमाई बहुत तेज़ी से बढ़ने लगती है।

पैसे का पेड़ जब बड़ा होता हैं, तो रूपये फलते हैं उसमे

अब वो बिना किसी मेहनत के आराम से, रुपये बटोरने लगता हैं। उसके द्वारा ट्रेन किये लोग, अब उसे कमा कमा कर देते हैं। उसके द्वारा लगाया गया पेड़ अब बड़ा हो गया हैं। रुपये का पेड़ अब उसे धन की ठंडी छाव देता है।

एक की छोटी सोच और दुसरे की बड़ी सोच, परिणाम में कितना अंतर हैं

पहला दोस्त वहीँ का वहीँ हैं, दूसरा दोस्त कामयाबी के शिखर पर हैं। उसने शुरू में ही बड़ी सोच से, पैसे का बीज बो दिया और आज उसे रुपये का पेड़ मिल गया हैं। बड़ी सोच, स्मार्ट वर्क और लोगों की ज़रूरत को पूरा करने वालें, ज़ल्दी सफलता की सीढ़ी चढ़ जाते हैं।

ज़रूरी है काम करते करते उस काम को सिखने की, Learn और Earn करने की

ऐसे और भी कई उदहारण हैं, जहाँ लोग सिर्फ आज की सोचते हैं, वो मेहनत और रिस्क लेने से डरते हैं। इसलिए वो जीवन भर, पैसों की तंगी में जीते हैं। सिर्फ काम करने की सोच, किसी को  आगे नहीं बढ़ने देती। वही जो काम करने के साथ साथ, उसे सीखते और समझते भी हैं, वो एक दिन उस काम के मालिक बन जाते हैं। वो पहले सीखते है फिर कमाते हैं।

बड़ी सोच से मिलती हैं बड़ी सफलता

एक हैं माली, जो बागबानी करता हैं, बगीचे में आम के पेड़ की देखभाल करता हैं। दूसरा हैं उस आम के पेड़ का मालिक, जो दूसरों की मेहनत से आम उगाकर उसे बेचकर, धन कमाता हैं। वो सिर्फ आम का पेड़ नहीं हैं, बल्कि आमदनी का पेड़ हैं, उसके लिए। तभी तो कहते हैं, रुपये पेड़ पर उगते हैं, जो पैसे का बीज बोते हैं।

आप को बगान का माली बनना हैं, या बगान का मालिक?

 

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Shyam Shah

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