0

वसंत पंचमी 2019, माता सरस्वती मानव जीवन का कल्याण करती हैं

वसंत पंचमी का मानव जीवन में महत्व

वसंत पंचमी यानि  माता सरस्वती की पूजा और उपासना का दिन। यह दिन बहुत ही ख़ास होता हैं, हम सभी के लिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता से विद्या, बुद्धि, कला एवं ज्ञान का वरदान मांगा जाता है। विद्यार्थी जीवन ही नहीं हमारा सम्पूर्ण जीवन और सृष्टि की सुंदरता का आधार सरस्वती माता हैं।

कला संस्कृति, गीत संगीत, चित्रकारी, लेखन, कुछ भी रचने की कला सबमे माँ सरस्वती का निवास हैं। इस साल बसंत पचंमी यानि सरस्वती पूजा का त्योहार 10 फरवरी (रविवार) को मनाया जाएगा।

धार्मिक ग्रंथों में वसंत पंचमी का वर्णन

इसी दिन माता सरस्वती की शक्ति ने मनुष्य के जीवन में प्रवेश किया था। धार्मिक ग्रंथो और शास्त्रों में ऐसी मान्यता हैं की सृष्टि को वाणी देने के लिये ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का था। इस जल से हाथ में वीणा धारण किये जो शक्ति प्रकट हुई वह सरस्वती देवी कहलाई। वह दिन बसंत पंचमी का दिन था इसलिए बसंत पंचमी को सरस्वती पूजन मनाया जाता हैं।  

सरस्वती पूजा से जुड़ी मान्यता

मान्यता है कि जिस छात्र पर मां सरस्वती की कृपा हो उसकी बुद्धि बाकी छात्रों से अलग और बहुत ही तेज़ होती है। ऐसे छात्र को कोई भी विद्या आसानी से प्राप्त हो जाती है। वो सीखने और समझने की कला में निपुण हो जाता हैं। खासतौर पर बसंत पंचमी में दिन यदि कोई छात्र मां सरस्वती की सही तरह से अराधना करे, उनके मंत्र का जाप करें तो मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सरस्वती पूजा के दिन करते हैं शुभारम्भ

वसंत पंचमी के दिन किसी भी कार्य को करना बहुत शुभ फलदायक होता है।  इसलिए इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, नवीन व्यापार प्रारंभ और मांगलिक कार्य किए जाते है इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते और साथ ही पीले रंग के पकवान बनाते हैं.

यह दिन बच्चों के माता पिता जी शिक्षा आरंभ के लिए विशेष के शुभ मानते हैं।  इस दिन से बच्चों को विद्यारंभ भी करानी चाहिए साथ ही उनकी जिह्वा पर शहद से ॐ और ऐं बनाना चाहिए, जिससे बच्चा ज्ञानी और मधुरभाषी होता है।  यदि बालक 6 माह का पूर्ण हो चुका है तो अन्न का पहला दाना इसी दिन खिलाना चाहिए।

वसंत पंचमी के दिन गलती से भी ये ५ गलतियां न करें

पहला

शास्त्रों में इस दिन काला कपड़ा पहनना वर्जित माना गया है. इस दिन पीले वस्त्र पहनना चाहिए।

दूसरा

बसंत पंचमी वाले दिन सात्विक भोजन करना चाहिए. इस दिन मांस-शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।  

तीसरा

बसंत पंचमी के दिन (कभी भी) हमें पेड़-पौधों को नहीं काटना चाहिए।  

चौथा

बसंत पंचमी के दिन (हमेशा ) सभी से प्यार और संयम से बोलना चाहिए।  इस दिन किसी से वाद-विवाद या क्रोध नहीं करना चाहिए।

पांचवा

सरस्वती पूजा के दिन बिना नहाए कुछ भी नहीं खाना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन हल्दी लगाकर सुबह स्नान जरूर कर लेना चाहिए। माता सरस्वती की पूजा के बाद ही कुछ खाना चाहिए।  

इस तरह से करें माता सरस्वती की पूजा

सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें। उनका ध्यान कर ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। मां सरस्वती की आरती करें दूध, दही, तुलसी, शहद मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाएं।

माता सरस्वती हम सभी के जीवन को को ज्ञान और शक्ति से भर दे, बस यही कामना करता हूँ  मैं।

आपका दोस्त – श्याम साह

Did you enjoy this article?
Signup today and receive free updates straight in your inbox. We will never share or sell your email address.
I agree to have my personal information transfered to MailChimp ( more information )

Shyam Shah

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *