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सना की उम्मीद और माँ की ज़िद – उम्मीद है तो ज़िंदगी है।

कैसे सना ने ज़िन्दगी की बाज़ी जीत ली ?

sana won battle for life

कहते हैं जहाँ उम्मीद ज़िंदा हो वहां मौत को भी मात मिलती हैं।  कुछ ऐसा ही हुआ तीन साल की मासूम सना के साथ। बिहार के मुंगेर की रहने वाली सना जब अचानक खेलते खेलते घर के पास बने बोरवेल में गिर गई।  १६० फ़ीट गहरे और संकरे बोरवेल में बेचारी करीब ४३ फ़ीट पर जाकर अटक गई थी। उसकी माँ की चीख पुकार, स्थानीय लोगो की सहायता और NDRF के सफल ऑपरेशन के चलते, सना की जान बचाई जा सकी।

३० घंटो तक चलने वाला ये ऑपरेशन किसी चमत्कार से कम भी नहीं था।  लेकिन कहते हैं न, एक माँ की दुआ, उसकी आस्था और अटल प्रयास कभी विफल  नहीं होती। सना जो स्वयं अपना ध्यान नहीं रख सकती थी, वो बच्ची किस तरह से मात्र ऑक्सीजन की सप्लाई पर खुद को ज़िंदा रख पाई ?  बिना कुछ खाये पिए, एक पतली सी गुफा में सना ने अपने हौसले को बनाये रखा।

उसके इस जज़्बे को लाखों सलाम हैं जो इंसान को कमज़ोर नहीं होने देती।  

ये सब कुछ हमें सोचने को मज़बूर करता हैं, इंसान कमज़ोर नहीं होता, बल्कि उसकी ईक्षा शक्ति कमज़ोर होती हैं।   

एक माँ ने अपनी बच्ची को ज़िंदा रखने के लिए , ३० घंटे तक बात करती रही।  एक माँ के शब्दों ने जादू सा काम किया, उस बच्ची को जीने की प्रेरणा मिलती रही।  दोनों का एक दूसरे पर प्रेम, विश्वास और उस उपर-वाले पर आस्था थी। एक तरफ पूरे टीम की कोशिश, लाखों लोगो की दुआ थी, तो एक तरफ एक माँ की ज़िद थी।  आख़िरकार सबकी कोशिश और दुआ रंग लाई, और उस मासून सना ने, मौत से ज़िन्दगी की जंग जीत ली।

यहाँ यह कहना ज़रूरी हैं की हमें ईश्वर ने कुछ अंदरूनी और चमत्कारिक शक्तियां पहले से दे रखी हैं।  हमें अपनी इन शक्तियों का अंदाज़ा ऐसी ही परस्थितियों के दौरान होता हैं।

हर शक्ति की परीक्षा मुश्किल घड़ी में ही होती हैं।  

आज अगर सना ज़िंदा हैं, और सही सलामत हैं तो इसके पीछे उसकी उम्मीद और विश्वास की शक्ति हैं, जिसने उसे ज़िंदा रखा।  एक माँ की ज़िद और अपने बच्चे की सलामती की चाहत, ने उसे लोगो का सहयोग दिलाया। जब हम कुछ पाना और कर दिखाना चाहते हैं, तो विषम परिस्थितियों में भी कोई न कोई राह निकल आती हैं।  

परिस्थितियां भले ही हमारे नियंत्रण में न हो, पर हम खुद को नियंत्रण में ज़रूर रख सकते हैं।  इस घटना ने, एक बार फिर सिद्ध कर दिया हैं की अगर जीने की चाहत हो तो मौत को भी टाला जा सकता हैं।  उम्मीद वो शक्ति है जिसका प्रयोग, हमें मुश्किल से मुश्किल समय में भी हिम्मत प्रदान करती हैं। चाहे कुछ भी हो जाए, हमें अपने उम्मीद की शक्ति को कभी कम नहीं समझना चाहिए। उम्मीद हैं तो कुछ भी असंभव नहीं हैं।    

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Shyam Shah

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