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ज़िन्दगी आइसक्रीम की तरह पिघल रही हैं, टेस्ट कीजिये या वेस्ट कीजिये

ज़िन्दगी एक आइसक्रीम की तरह है, जो पिघलती जा रही हैं।

ज़िन्दगी एक आइसक्रीम की तरह है, जो पिघलती जा रही हैं, इसे आप दुनिया के किसी भी फ्रीजर में संभाल कर नहीं रख सकते। वक़्त के साथ साथ ये पिघलते हुए, गायब हो जायेगा।

हर किसी को अपना अपना आइसक्रीम खुद टेस्ट करना हैं, अगर आप दुसरो की आइसक्रीम देखते रहेंगे, तो आप अपनी आइसक्रीम को टेस्ट नहीं कर पाएंगे। अगर आप टेस्ट नहीं करेंगे,  तो दो बातें होंगी, आपका आइसक्रीम भी वेस्ट हो जायेगा और टेस्ट भी नही ले पाएंगे।

कितना अच्छा होता की आप अपना आइसक्रीम टेस्ट करते हुए दुसरो को भी देखते, इससे आपका आइसक्रीम टेस्ट और वेस्ट दोनों होने से बच जाता।

अपनी खुशियों को देखिये औरो से जलिए नहीं

हम अपनी ज़िन्दगी में भी औरों की खुशिया गिनते रहते हैं, कभी पुरानी यादों का पिटारा खोलकर बैठ जाते हैं। कभी बहुत दूर की सोचने लगते हैं, ऐसा होगा तब मैं खुश होऊंगा। इसी चक्कर में आइसक्रीम सी ज़िन्दगी पिघलती जाती हैं। यह नहीं देखते की अभी जो पास में हैं, उसका स्वाद क्यों न लूं, सोचने से तो वक़्त और ज़िन्दगी (आइसक्रीम) ख़त्म ही हो रही है।

जब तक अक्ल आती हैं, आइसक्रीम पिघलकर पूरा बह चूका होता है। हम सोचते हैं, काश की एक बार चख लिया होता, तो समझ में आता की मेरी ज़िन्दगी कैसी थी?

ज़िन्दगी के हर लम्हें, हर पल को जीना है

आइसक्रीम को हम पिघलने से तो नहीं रोक सकते, पर उसको पूरे आनंद से चखते हुए, अपने आत्मा और मन को तृप्त तो कर सकते हैं। स्वाद का आनंद पूरे आखिर छोड़ तक लीजिये, इसे न दूसरा कोई चख सकता हैं, न रख सकता है। ये आपकी अपनी ज़िन्दगी है, इसका मज़ा सिर्फ आप उठा सकते हैं।

आइसक्रीम का स्वाद लेकर इस दुनिया से जाना हैं, या ज़िन्दगी की आइसक्रीम को चखे बिना जाना चाहते हैं? वैसे भी तो यह पिघल ही रही हैं, ज़ल्दी से इसके हर बाइट का आनंद लीजिये, इससे पहले की हाथ में पछतावे के सिवा कुछ न रह जाए।

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Shyam Shah

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