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ज़िन्दगी जीने का सही तरीका भौंरे से सीखिए

 भौंरे से सीखिए जीवन का सही ज्ञान भौंरा बनिए मक्खी नहीं

हमेशा दोष ढूंढने वाले इंसान की तुलना हम उस मक्खी से कर सकते हैं जो पूरे साफ शरीर को छोड़कर घाव पर जा बैठता है। जो साफ़ सफाई को नहीं गन्दगी में रहना चाहता हैं, यह उसकी विशेषता हैं। वही एक भौंरा जो सिर्फ फूलों पर मंडराता हैं, हर फूल से पराग रस लेकर मधु एकत्र करता हैं।मधु जिसका उपयोग हम अपने स्वास्थय और सुन्दरता के लिए करते हैं। भौंरा सबमे गुण देखता है और उन गुणों को चुनकर मीठा रस बनता हैं, जिसे हम मधु कहते हैं।

अपने अन्दर सिर्फ गुणों का मधुर रस भरिये

भौंरा हमें यह सिखाता हैं की जीवन का हर परिणाम हर पल मीठा हो सकता हैं, अगर हम लोगों की अच्छाई को देखकर उसे अपने जीवन में धारण कर सके। जैसे भिन्न भिन्न फूलों को एकत्र कर एक अच्चा गुलदस्ता बनता हैं वैसे ही भिन्न भिन्न गुणों का समावेश अपने अन्दर करके हम गुणवान, चरित्रवान बन सकते हैं। एक अच्छा इंसान अपने गुणों और अच्छे चरित्र के कारण  लोगों का प्रिय बनता हैं। जीवन में हम हर लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं अगर हमारे अन्दर गुण भरे हो।

भौंरा हर फूल को ख़ास समझता हैं, इसलिए हर फूल अपना प्यार रुपी पराग उसे सौंप देता हैं, न्योछावर कर देता है। आप की कामयाबी बहुत हद तक आपके गुणों पर निर्भर करती हैं। आप सबसे पहले एक अच्छें इंसान बनिए फिर आप जो चाहे वो बन सकते हैं।

लोगो के गुणों का सम्मान कीजिये, उनकी तारीफ कीजिये

जब भी आप किसी से प्रभावित होते हैं, तो आप उनसे अच्छा वयवहार करते हैं, उन्हें अपना दोस्त बनाना चाहते हैं। आखिर क्यों हम किसी से प्रभावित होते हैं, वो कौन सा गुण हैं जिस कारण हम उनसे दोस्ती करना चाहते हैं। यह एक ऐसी कला हैं जो हर किसी को सीखनी चाहिए, ये आपके ज़िन्दगी को कामयाबी की राह पर ले जाता हैं।  एक इंसान जीवन में प्यार और प्रशंसा पाना चाहता है, जब उसे यह मिलता हैं तो वह हंसी ख़ुशी से हर काम करता हैं।

हम अपने दैनिक जीवन में रोज़ किसी न किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, हर व्यक्ति अपने आप में अलग हैं। हर व्यक्ति अपने आप में विशेष हैं, जो बात उसमे हैं वो आपमें नहीं, वो एक अच्छा वक्ता हो सकता हैं और आप एक अच्छे चित्रकार। हर किसी में कोई न कोई गुण ज़रूर होता हैं, हमे औरों के गुणों को देखना चाहिए। जो गुण हम दुसरो में देखते हैं वो गुण हमारे अन्दर भी आ जाता हैं।अगर हम किसी में सिर्फ बुराई ढूंढे तो हम भी उस बुराई को अपने में ढाल लेते हैं।

अपने जीवन को अच्छे कर्मों में लगाइए

एक अच्छा और कामयाब इंसान औरों को उसके गुण और दोष के साथ अपनाता हैं। बाद में वो सिर्फ उसके गुण को देखते हुए उसकी बुराइयों को ऐसे ख़त्म करता हैं, जैसे एक डॉक्टर बीमारी को। जीवन में आप मक्खी बनकर दुत्कार पाना चाहते हैं या भौंरा बनकर सत्कार पाना चाहते हैं? जैसे मधु हर किसी के कितने काम आता हैं, वैसे ही आपके अपने और औरों के गुण मिलकर समाज का कितना कल्याण कर सकते हैं, ज़रा सोचिये।

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Shyam Shah

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