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10 मोटिवेशनल फ़िल्में, जिसे आपको ज़रूर देखनी चाहिए

  आपकी कामयाबी के  लिए  10 मोटिवेशनल   फ़िल्में

फिल्म के ज़रिये समाज में कैसे बदलाव लाया जा सकता हैं? फिल्म से लोगो को कैसे प्रभावित किया जा सकता हैं? फ़िल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, कुछ सिखाती भी है।जब मैं यह सब सोच रहा था, तो मुझे बॉलीवुड की कुछ बेहद प्रेरणात्मक  फिल्मों के बारे में ध्यान आया। मैंने उनमें से 10 ऐसी ही फिल्मों की लिस्ट बनाई, आपके सभी के लिए।

                                          3 इडियट्स

निर्देशक राजकुमार हिरानी की यह फिल्म, हर किसी की पसंदीदा फिल्म हैं। इसे दुनिया भर के लोगो ने खूब सराहा हैं। 3 इडियट्स फिल्म लोगो को मनोरंजन के माध्यम से प्रेरित करती हैं। इसका मुख्य किरदार रांचो (आमिर खान ) बड़े ही सहज और सरल तरीके से कुछ ऐसी बात सिखाता हैं, जिस पर हम सभी को गौर करना चाहिए। उनमें से कुछ इस तरह हैं

  1. कामयाबी के पीछे मत भागो, पहले कामयाब बनो, फिर कामयाबी तुम्हारे पीछे झख मार कर आएगी।
  2. बिना सोचे समझें हम रट्टा मारकर सिर्फ पास हो सकते हैं, जो हमें जीवन में काम नहीं आता।
  3. ज्ञान हर जगह बंट रहा हैं, जहाँ से भी मिले उठा लो।
  4. लाइफ में वही करो, जिसके लिए तुम बने हो, तभी तुम कामयाब बनोगे।
  5. हमेशा अपने दिल की सुनो, जो होता तो लेफ्ट में हैं, पर हमेशा राईट डिसीजन देता हैं।

                                         आई ऍम कलाम

आई ऍम कलाम फिल्म के निर्देशक नील माधब पांडा हैं, जो हमेशा कुछ अलग तरह की फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म की सबसे ख़ास बात हैं इसकी प्रेरक कहानी। यह फिल्म एक गरीब बच्चे की हैं, जो ढाबे में काम करता हैं, और स्कूल जाता हैं। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम से प्रभावित यह फिल्म, सन्देश देती है हर किसी को पढने का हक हैं। हर कोई पढ़कर शिक्षित और कामयाब बन सकता हैं। फिल्म में छोटू, कलाम के जीवन संघर्ष से प्रभावित होता हैं, बड़ा आदमी बनने का संकल्प लेता हैं, और कहता हैं आई ऍम कलाम।            

                                      मांझी-दी माउंटेन मैन

केतन मेहता की यह फिल्म दशरथ मांझी के जीवन पर बनी एक बेहतरीन फिल्म हैं। गया, बिहार के रहने वाले दशरथ मांझी ने 22 सालों तक अकेले, सिर्फ छेनी और हथोड़े के दम पर, एक विशाल पथ्तर का सीना तोड़कर रास्ता बनाया, जिसके बाद उन्हें लोगो ने माउंटेन मैन की उपाधि दी। नवाज्ज़ुद्दीन सिद्दीकी ने दशरथ मांझी का किरदार बखूबी निभाया हैं। इस फिल्म का सन्देश हैं, समस्या आपके मन और आत्मविश्वास से शक्तिशाली नहीं हैं। कुछ बड़ा करने के लिए आपको किसी के साथ की ज़रूरत नहीं हैं, आप अकेले ही काबिल हैं। इस फिल्म में एक बढ़िया बात कही गई हैं “आप भगवान के भरोसे मत बैठो, क्या पता भगवान आपके भरोसे बैठा हो”  

                                                 आनंद

बात जब भी प्रेरणात्मक फिल्मों की होगी, तो आनंद फिल्म का नाम ज़रूर आएगा। स्व:राजेश खन्ना की यह सबसे बेहतरीन फिल्मों में शुमार हैं। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं इसमें जीवन जीने  की कला हैं। सामने मौत खड़ी हो, तो भी हँसते हँसते आनंद के साथ कैसे जिया जाए, यह इस फिल्म का सबसे बड़ा सन्देश हैं। मझे यह फिल्म सबसे ज्यादा पसंद हैं, जब भी जीवन में उदासी आती हैं, इस फिल्म को देखकर मेरा मन खुश हो जाता हैं। आप भी इस फिल्म को ज़रूर देखिये, जीवन को बेहतर समझने के लिए।

                         लगान – वन्स अपोन ए टाइम इन इंडिया

निर्देशक आशुतोष गवारीकर की यह फिल्म बहुत ही प्रेरक फिल्म हैं। इस फिल्म का मुख्य किरदार भुवन (आमिर खान) अंगेजों से लगान माफ़ कराने के लिए, क्रिकेट मैच खेलने की शर्त लगाता हैं। इस फिल्म से हम बहुत कुछ सिख सकते हैं। यह फिल्म टीम मैनेजमेंट और जीवन में संघर्ष से लड़ना सिखाती हैं। कैसे टीम भावना काम करती हैं? आपकी टीम कैसे अच्छा  पर्दर्शन करें, कैसे आप अपने टीम का मनोबल बढ़ाये, कैसे उनकी विशेषता के अनुसार उन्हें काम सौंपे और कैसे जितने की तैयारी करें, यह इस फिल्म का सबसे बड़ा ज्ञान हैं। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं जो सिखा नहीं जा सकता। यह फिल्म यही दिखाता हैं। इसे आपको ज़रूर देखना चाहिए।

                                      जो जीता वही सिकंदर

निर्देशक मंसूर खान की यह फिल्म हर किसी के लिए हैं, इसमें सब कुछ हैं, मनोरंजन, ज्ञान, कॉमेडी और रोमांस। इस फिल्म में संजू (आमिर खान ) बिना किसी मकसद के अपनी ज़िन्दगी से खुश हैं, उसके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होता। पर एक घटना से कैसे उसे जीवन का लक्ष्य मिलता हैं, और कैसे वो खुद को तैयार करता हैं और जीत कर सिकंदर बनता हैं, यह इस फिल्म की कहानी हैं। इस फिल्म में सबसे बड़ी बात यह बताई गई हैं की बिना लक्ष्य के हम अपने अन्दर की छुपी हुई शक्ति को पहचान नहीं सकते। दुनिया जितने वालों को ही सलाम करती है।

                                               तारे ज़मीन पर

अभिनेता आमिर खान की निर्देशक के रूप में पहली फिल्म हैं, तारे ज़मीन पर। कहने को तो ये फिल्म बच्चों की हैं, पर इसमें सबसे ज्यादा शिक्षा माँ बाप के लिए हैं। अगर माँ बाप बच्चे की समस्या नहीं समझेंगे, तो और कौन समझेगा? एक बच्चा सबसे ज्यादा अपने घर से सीखता हैं। इस फिल्म में यही बताया गया हैं की हर बच्चे की अपनी अपनी खाशियत और कमजोरियां हैं, उसकी तुलना नहीं करनी चाहिए, किसी भी बच्चे के साथ। हर बच्चा ख़ास होता हैं। अगर आप एक माँ या पिता हैं, तो इस फिल्म को देखिये ज़रूर, ऐसी फिल्मे बहुत कम बनती हैं।

                                                   इकबाल

नागेश कुकुनूर की यह फिल्म एक बहुत ही प्रेरक फिल्म हैं। इस फिल्म का मुख्य किरदार इक़बाल (श्रेयश तलपड़े ) एक गूंगा और बहरा लड़का हैं, जो अपने खेंत में भैस चराता हैं। पर उसकी आँखों में एक क्रिकेटर बनने का सपना हैं, और कैसे अपनी कमियों और अपने पिता के ईक्षा के खिलाफ जाकर, इक़बाल अपने सपने को पूरा करता हैं यह देखनें लायक हैं। इस फिल्म से हम यह सीखते हैं, की शारीरिक कमजोरी से कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर मन में विश्वास हतो हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता हैं। इसे भी ज़रूर देखना चाहिए आपको, आत्मविश्वास के लिए।

                                                  बागबान

निर्देशक रवि चोपड़ा की यह फिल्म कई मायनो में बहुत ही ख़ास हैं, यह एक ऐसी फिल्म हैं जिसे देखकर आँखों में आंसू आ जाते हैं। दिल को छू लेने वाली यह फिल्म हर किसी को देखनी चाहिए। जो बच्चें माँ बाप को बोझ समझते हैं, वो कभी खुश नहीं रह सकते हैं। माँ बाप हमारे लिए कितना कुछ करते हैं, हम उनका किया कभी नहीं उतार सकते। पर उनकी सेवा करके, उन्हें दुःख न देकर उनका आशीर्वाद और प्यार हमेशा पा सकते हैं।

                                            स्वदेश-वी द पीपल

निर्देशक आशुतोष गवारीकर की यह फिल्म एक ऐसी फिल्म हैं, जो भारत और इंडिया में कितना अंतर हैं, यह दर्शाती हैं। इसकी कहानी एक गाँव और वहां फैले जातीय प्रथा, भेद भाव पर केन्द्रित है। मोहन भार्गव (शाहरुख़ खान ) एक वैज्ञानिक हैं नासा में, जो अपने गाँव आता हैं। गाँव की दुर्दशा और गरीबी देखकर उसके मन में कुछ करने की भावना जागती हैं। वो गाँव की भलाई और उन्नति के लिए अपने पैसो से बिजली उत्पादन करने का प्रोजेक्ट डालता हैं। जिससे गाँव वालों को फायदा मिलता हैं। इस फिल्म की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं, अपने देश के लिए हम क्या कर सकते हैं? हम अपने समाज को कैसे अपना योगदान दे सकते हैं?

यह सभी फिल्मे अपने आप में ख़ास हैं, अपनी कहानी और विषय वस्तु को लेकर। फिल्मों से भी हम कितना कुछ सिख सकते हैं, उसके विचारों को अपने जीवन में उतारकर हम भी अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। अगर आप सभी ने ये फ़िल्में नहीं देखि है तो इसे एक बार ज़रूर देखिये।

 

 

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Shyam Shah

5 Comments

  1. saahi hai bhai aanand film saabse mmaast hai mujhe bhi anand film aacha laga hai
    shyam bhai sahi hai
    keep it uppp

  2. sir ji bagban aaisa film hai joo hamae batta hai ki aapna hamse jitna pyyar nahi karta uutna haaaaaaaaaamee paraya karta hai

  3. sahi hai ssir I like baghban and ananad film and baghban film thore sae samaaye ke liyae jiyoo bhaiaachae kaam karo
    in baghban film I notice that if you will give ttooo much for our son/daughter then they will not respect us like baghban film but if you will help any poor people for study or any thing then he wil see you like godddddd.

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